43. केबिनेट मिशन को प्रस्तुत ज्ञापन - Page 149

130 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

होती। यह सत्य है कि संख्या की दृष्टि से वे ब्रिटिश भारत का सबसे बड़ा एकल दल है, किन्तु भारत का प्रतिनिधित्व करने के तथ्य के आलोक में उनका दावा भारत के जटिल जीवन में महत्वपूर्ण कारकों द्वारा पूरी तरह से अस्वीकार किया जाता है। ये अन्य कारक अपने अधिकार को दृढ़ता पूर्वक रखते हैं कि उन्हें अधिसंख्य अल्पसंख्यक न माना जाए बल्कि भविष्य की किसी भारतीय नीति में एक अलग सांविधानिक कारक माना जाए। इन कारकों में सबसे पहले वृहŸा मुस्लिम समुदाय आता है। उन्हें भौगोलिक निर्वाचन क्षेत्रों में बहुमत के वोट से चुनी गई संविधान सभा द्वारा बनाए गए संविधान से कुछ लेना-देना नहीं है। वे दावा करते है कि किसी भी सांविधानिक विचार-विमर्श के समय उन्हें केवल संख्यात्मक आधार पर बहुसंख्यक न मानकर उनके अस्तित्व को समझा जाए। यही सब उस अन्य महान निकाय पर भी लागू होता है, जिसे अनुसूचित जाति के रूप में जाना जाता है, जो उनकी ओर से गांधी जी के सतत् प्रयासों के बावजूद, यह महसूस करता है कि एक समुदाय के रूप में वे हिंदू समुदाय, जिनका कांग्रेस द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाता है, के मुख्य निकाय से बाहर रहते हैं।

----मा.मि.एल.एस.एमरी, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया द्वारा 14 अगस्त, 1940 को हाउस ऑफ कॉमन्स में दिए गए भाषण का उद्धरण।

(5) ‘‘3. समस्त * ............ कारणों की विस्तार में पुनरावृŸा किए बिना मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा कि हिज मेजेस्टी की सरकार ने * ................के समय स्पष्ट किया था;

(ख) कि विरोध समाप्त कर दिए जाने के बाद अनर्हित आजादी के उनके प्रस्ताव पर यह शर्त रखी गई थी कि भारतीय जीवन के हिज मेजेस्टी की सरकार के साथ आवश्यक संधि व्यवस्थाओं पर बातचीत की सहमति दी जाएगी।

कि विरोध अवधि के दौरान संविधान में कोई परिवर्तन करना असंभव है, जिसके द्वारा जैसा आपका सुझाव है, केवल ‘‘राष्ट्रीय सरकार’’ को सेंट्रल असेम्बली के लिए जिम्मेदार बनाया जा सकता है।

इन शर्तों का उद्देश्य यह सुनिश्वित करना था कि जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों, दलित वर्गों के हितों और भारतीय राज्यों के साथ उनकी संधि की बाध्यताओं की रक्षा का उनका कर्तव्य पूरा होता हो।’’

...लॉर्ड वॉवेल द्वारा 15 अगस्त, 1944 को गांधी जी को लिखे गए पत्र से उद्धरण।