55. मैं अनुसूचित जाति के अधिकारों के लिए लड़ रहा हूं प्रधानमंत्री एटली को लंदन भेजा गया तार संदेश - Page 188

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केबिनेट मिशन ने भारत की अंतरिम सरकार में अनुसूचित जातियों को अपर्याप्त प्रतिनिधित्व दिए जाने की सिफारिश की थी। डॉ. भीवराव अम्बेडकर द्वारा ग्रेट ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री मिस्टर एटली को भेजा गया तार संदेश।

पिछले वर्ष आयोजित शिमला सम्मेलन में मेरे विरोध करने पर वॉयसराय ने होम गर्वन्मेंट की सहमति से यह वायदा किया था कि अंतरिम सरकार की 14 सीटों की परिषद में से 2 सीटें अनुसूचित जाति को दी जाएंगी, जबकि मैंने तीन की मांग की थी किन्तु मैंने 2 सीटें स्वीकार कर लीं। कल अपने नए प्रस्तावों में अंतरिम सरकार ने घोषणा की कि अनुसूचित जाति को केवल एक सीट दी जाएगी। विचार-विमर्श के बाद एतर्द् द्वारा किए गए वचन के बाद यह उस वचन का उल्लंघन है। केवल एक सीट बहुत बड़ा अन्याय होगा, जबकि मिशन प्रतिनिधित्व के मामले में 6 करोड़ अछूतों को चालीस लाख सिक्खों और तीस लाख ईसाईयों के बराबर मानकर व्यवहार कर रहा है। अनुसूचित जाति का नामित, अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व नहीं करता, क्योंकि वह पूर्णतया हिन्दू मतों द्वारा चुना जाता है और वह कांग्रेस की देन होता है। एक अनुसूचित जाति का कांग्रेसी अनुसूचित जाति का प्रतिनिधि नहीं है। यह कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है। केबिनेट मिशन अनुसूचित जातियों पर एक के बाद एक गलतियां थोपे जा रहा है, जिससे वह कांग्रेस की कृतज्ञता तले दबी जा रही हैं और देश के सार्वजनिक जीवन में अपनी स्वतंत्र हैसियत को नष्ट कर रही हैं। कृपया इसमें हस्तक्षेप करें और गलती को सुधारते हुए मिशन को अनुसूचित जातियों के संघ के नामांकित व्यक्तियों द्वारा दो सीटें भरने के निर्देश दें, जैसा कि मिशन को ज्ञात है कि तभी अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व हो सकता है। अनुसूचित जातियां दो अन्यथा शून्य सीटें देने का आग्रह करती हैं। मेरे उद्देश्य को आप गलत न समझें इससे बचने के लिए मैं बताना चाहूंगा कि अंतरिम सरकार में शामिल होने की मेरी कोई इच्छा नहीं है और मैं इससे बाहर ही रहूंगा। मैं अनुसूचित जाति के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा हूं। उम्मीद करता हूं कि ब्रिटिश सरकार में न्याय की कुछ समझ अवश्य होगी।  ......डॉ. अम्बेडकर

दिनांकः 17-06-1946

डॉ. भीम राव अम्बेडकर

22, पृथ्वी राज रोड़

नई दिल्ली।