54. ब्रिटिश केबिनेट की योजना पर प्रतिक्रियाएं डॅ. अम्बेडकर का चर्चिल को विरोध - Page 187

168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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ब्रिटिश केबिनेट की योजना पर प्रतिक्रियाएं
डॅ. अम्बेडकर का चर्चिल को विरोध

केबिनेट मिशन ने 16 मई, 1946 को ‘‘राज्य-पत्र’’ प्रकाशित किया, जिसमें अछूतों की सुरक्षा के लिए कोई उपबंध नहीं किया गया था। डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने इसे गंभीरता से लिया और इस मामले में हस्तक्षेप के लिए श्री चर्चिल को पत्र लिखा। डॉ. अम्बेडकर के पत्र के उŸार में, श्री चर्चिल ने सकारात्मकता दिखाई। डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा लिखा गया पत्र निम्नानुसार है-

‘‘श्री विंस्टन चर्चिल ने आशाजनक रूप से अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा का दृष्टांत देते हुए कहा कि कंजर्वेटिव पार्टी’’ भारत के 6 करोड़ अछूतों के भविष्य की सुरक्षा के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेगी।

‘‘वॉयसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य डॉ. भीमराव अम्बेडकर से मिले विरोध पत्र के उŸार में, कि स्वतंत्र भारतीय सरकार के लिए केबिनेट मिशन के प्रस्ताव अछूतों के लिए एक शर्मनाक विश्वासघात की तरह थे,’’ विपक्ष के नेता ने एक तार संदेश के माध्यम से डॉ. अम्बेडकर को बतायाः ‘‘हम अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा में तय व्यापक सिद्धांतों पर अपना रुख कायम रखेंगे कि सभी व्यक्ति स्वतंत्र और समान पैदा होते हैं तथा उन्हें जीवन जीने, स्वतंत्र रहने और प्रसन्न रहने का अधिकार है।’’ डॉ. अम्बेडकर के संदेश का उद्धरण इस प्रकार हैः

‘‘केबिनेट मिशन के प्रस्ताव 6 करोड़ अछूतों के प्रति एक शर्मनाक विश्वासघात है। संविधान सभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं, सलाहकार, समिति में कोई प्रतिनिधित्व नहीं, संधि के द्वारा कोई सुरक्षा नहीं, अर्थात् इसका अभिप्राय होगा अछूतों के हाथ और पैर बांध दिए जाना। भारत का प्रत्येक अछूत नागरिक संसद में दिए गए आपके भाषण के लिए आपका आभारी है। अछूतों का भविष्य बहुत अंधकारमय है। हम उनके हितों की सुरक्षा के लिए आप पर निर्भर हैं।’’

श्री चर्चिल ने उŸार दिया कि ‘‘आप निश्चिन्त हो सकते हैं कि कन्जर्वेटिव पार्टी 6 करोड़ अछूतों के भविष्य की रक्षा के लिए अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेगी, जिसका उनके समान धर्मावलंबियों द्वारा दुखदायी अवसाद माना जाना भारतीय उप-महाद्वीप की समस्याओं का एक गंभीरतम कारक है। हम अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा में तय व्यापक सिद्धांतों पर अपना रुख कायम रखेंगे कि सभी व्यक्ति स्वतंत्र और समान पैदा होते हैं तथा उन्हें जीवन जीने, स्वतंत्र रहने और प्रसन्न रहने का अधिकार है’’।

1ः जय भीम, दिनांक 18 जून, 1946