56. क्या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत के अछूतों का प्रतिनिधित्व करती है? - Page 193

174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इस बयान का कोई आधार नहीं है। अनुसूचित जाति संघ अन्य प्रान्तों में भी अपना कार्य उसी प्रकार कर रहा है और उसने बम्बई और मध्य प्रातों की भांति ही अन्य स्थानों पर भी उल्लेखनीय चुनावी सफलताएं हासिल की हैं। यह बयान देते हुए मिशन डॉ. अम्बेडकर द्वारा संविधान सभा के चुनाव में उनकी अकेली विजय पर विचार करने में असफल रहा। वह बंगाल प्रान्तीय विधान सभा के उम्मीदवार के रूप में खड़े हुए। उन्होंने प्राथमिक पसंद वाले 7 मत अपने हक में प्राप्त किए और चुनाव में, जहां तक सामान्य सीटों का संबंध था, सर्वाधिक वोट प्राप्त किए, यहां तक कि उन्होंने कांग्रेस दल के नेता श्री शरत चन्द्र बोस को भी पराजित कर दिया था। यदि बम्बई और मध्य प्रातों के बाहर डॉ. अम्बेडकर का प्रभाव नहीं है, तो वे बंगाल से कैसे चुने गए? यह भी याद रखा जाए कि बंगाल प्रान्तीय विधान सभा की 30 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इन 30 में से कुल मिलाकर 28 सदस्य कांग्रेस के टिकट पर चुने गए थे। 2 सदस्य इनके दल के थे, जिनमें से एक चुनाव के दिन बीमार पड़ गया था। इसका अर्थ यह हुआ कि कांग्रेस के टिकट पर जीते अनुसूचित जाति के 6 सदस्यों ने कांग्रेस के आज्ञापत्र का विरोध किया और डॉ. अम्बेडकर के पक्ष में वोट दिया। इससे यह परिलक्षित होता है कि कांग्रेस से संबद्ध अनुसूचित जाति के ये सदस्य अनुसूचित जाति के नेता के रूप में डॉ. अम्बेडकर का सम्मान करते हैं। यह तथ्य मिशन के बयान को पूरी तरह झुठलाता है। कांग्रेस मिशन के आत्मसमर्पण से इतनी उत्साहित है कि मिशन को संबोधित अपने एक पत्र में कांग्रेस ने अनुसूचित जातियों को अल्पसंख्यक मानने से ही मना कर दिया है। इसका यह अभिप्राय है कि कांग्रेस अनुसूचित जातियों को वे रक्षोपाय प्रदान किए जाने को तैयार नहीं है, जैसा वह अन्य अल्पसंख्यकों के मामले में तैयार है। मिशन ने कांग्रेस के इस सुझाव का खण्डन किया है। इसमें एक बहुत बड़ी आशंका छिपी है और बहस के दौरान मिशन के विचारों का ठीक-ठीक पता लगाना तथा उन्हें बाध्य करना आवश्यक है कि क्या वे अनुसूचित जातियों को अल्पसंख्यक मानते हैं अथवा नहीं।

अपने प्रस्तावों में मिशन ने कहा है कि सŸा के हस्तांतरण से पहले संसद को यह स्वयं सुनिश्चित करना होगा कि अल्पसंख्यकों के लिए प्रदŸा रक्षोपाय पर्याप्त हैं। मिशन ने कहीं भी इन रक्षापायों की जांच के लिए किसी तंत्र का उल्लेख नहीं किया है। क्या संसद के दोनों सदनों की संयुक्त समिति अल्पसंख्यकों के रक्षोपायों की जांच करेगी, इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। मिशन ने यह उल्लेख तक नहीं किया है कि हिज मेजेस्टी की सरकार रक्षापायों की पर्याप्तता के अपने निष्कर्षों पर पहुंचने के लिए अपने स्वतंत्र निर्णय का उपयोग करेगी। इन मुद्दों को स्पष्ट करना आवश्यक है, क्योंकि यह उपबंध मिशन द्वारा बाद में सोचा गया और यह उसके मूल प्रस्तावों का हिस्सा नहीं था, जिससे यह लगता है कि इसका आशय केवल अल्पसंख्यकों की गतिविधियों को रोकना मात्र था।