56. क्या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत के अछूतों का प्रतिनिधित्व करती है? - Page 192

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बंगाल 12

संयुक्त प्रांत 03

मध्य प्रांत 05

पंजाब 07

बिहार और उड़ीसा के प्रांतों में कोई प्रारंभिक चुनाव नहीं हुए।

40 चुनाव क्षेत्रों में हुए प्रारंभिक चुनावों के परिणाम इस के टिप्पणी के साथ संलग्न परिशिष्ट में तालिकाबद्ध किए गए हैं। परिणामों ने सिद्ध कर दियाः

( i ) कि 283 उम्मीदवारों में से कांग्रेस ने अपने टिकट पर केवल 46 उम्मीदवार

खड़े किए (तालिका I देखें) और 168 सफल उम्मीदवारों में से इसकी ओर से केवल 38 उम्मीदवार जीत सके (तालिका V देखें)।

( ii ) प्रारंभिक चुनावों में भाग लेने वाले किसी दल का उद्देश्य अंतिम चुनाव में अपने दल के टिकट पर कम से कम चार उम्मीदवारों को खड़ा करके अपने सभी विरोधी दलों को बाहर का रास्ता दिखाना रहता है। क्या कोई दल अपने टिकट पर चार उम्मीदवारों को खड़ा कर सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसे अपने मतदाताओं पर कितना विश्वास है, कि वे उसके दल को ही मत देंगे। कांग्रेस ने प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक उम्मीदवार खड़ा करने का साहस नहीं दिखाया। यह दर्शाता है कि कांग्रेस को विश्वास नहीं था कि अनुसूचित जातियों के मतदाता कांग्रेसी उम्मीदवार को वोट देंगे। यदि किसी दल ने एक निर्वाचन क्षेत्र में चार उम्मीदवार खड़े करने का साहस दिखाया, वह अनुसूचित जाति संघ है। (तालिका- II, भाग- I, V, स्तभ 3 एवं 4 देखें)।

( iii ) कांग्रेस के पक्ष में पड़े मतों की संख्या देखी जाए, तो बिना किसी विवाद के यह सिद्ध हो जाता है कि प्रारंभिक चुनावों में पड़े कुल वोटों में से कांग्रेस ने केवल 28 % मत प्राप्त किए (तालिका IV देखें)।

( iv ) यदि किसी व्यक्ति को अंतिम चुनाव में हिन्दू मतों को मदद से जीतने का लालच नहीं होता तो सभी स्वतंत्र उम्मीदवार अनुसूचित जाति संघ के ही सदस्य होते। इस अनुमान की कि केवल अनुसूचित जाति संघ ही ऐसा दल है जो अनुसूचित जातियों को प्रतिनिधित्व करता है, गैर-कांग्रेसी दलों के पक्ष में पड़े 72 % मत इस आशय की पुष्टि करेंगे (तालिका IV देखें)।

केबिनेट मिशन के सदस्यों ने बहस की कि डॉ. अम्बेडकर की प्रसिद्धि केवल बम्बई प्रेसिडेंसी और मध्य प्रांतों की अनुसूचित जातियों तक ही सीमित है।