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लन्दन से भारत वापस आने पर पत्रकारों ने कराची हवाई अड्डे पर 15 नवम्बर,
1946 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर से बातचीत की थी। इसकी रिपोर्ट इस प्रकार है
ः सम्पादक।
कराची, 15 नवम्बर, 1946 : यूनाइटेड किंगडम की यात्रा से वापस लौटकर
यहाँ डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए आशा व्यक्त की कि
ब्रिटिश सरकार भारत को संप्रभुता के हस्तांतरण से संबंधित अधिनियम को संसद में
पारित करने से पूर्व वंचित वर्गों सहित अल्पसंख्यकों की वास्तविक आकांक्षाओं को
जानने के लिए कुछ ठोस कदम उठाएगी।
वंचित वर्गोंं के बीच शांति बनाए रखने के लिए डॉ. अम्बेडकर ने इस अंतिम
घड़ी में भी कांग्रेस से वंचित वर्गों को अलग राजनैतिक प्रतिनिधित्व देने की अपील
की।
उन्होंने कहा कि वंचित वर्गों की समस्याओं के बारे में ब्रिटिश प्रधानमंत्री और
भारत के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के अलावा श्री चर्चिल, श्री आर. ए. बटलर, लॉर्ड
टेम्पलवुड, पूर्व सर सैम्युअल होअर, जिन्हांने भारत के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के पद
पर रहते हुए 1935 का इण्डिया एक्ट प्रस्तुत किया था और लॉर्ड स्केपरबरो से भी
चर्चा की थी।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि ब्रिटेन में भारत के वंचित वर्गों के प्रति न केवल हार्दिक
सहानुभूति है बल्कि जिस तरीके से कैबिनेट मिशन ने वंचित वर्गां की अनदेखी की
है, उसके प्रति आक्रोश भी है। उन्होंने आगे कहा : चुनाव के आँकड़ों का विश्लेषण
करते हुए जो ज्ञापन मैंने प्रस्तुत किया वह सबको चौंका देने वाला था, क्योंकि उन
आँकड़ों ने ब्रिटिश कैबिनेट मिशन के सदस्यों द्वारा हाऊस ऑफ कॉमन्स में दिए गए
उस बयान को झुठला दिया कि कांग्रेस ही अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व करती