187
16
किसी अन्य की तुलना में, मैं बड़ा राष्ट्रवादी हूँ
| f | d | l |
|---|
| v | U; |
|---|
| d | h |
|---|
| r | qy |
|---|
| c | M+ |
|---|
| "Vªo | knh |
|---|
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अब अपने लोगों का आहान किया है कि वे न्याय और मानवता के हित में युद्ध के लिए उठ खड़े हों, और अपने लोगों के अधिकारों के विरोध में होने वाली चालबाजियों और षड़यंत्रों को उजागर करें। वे जानते हैं कि अपने लोगों के अधिकारों और इच्छा के लिए दावा करने का यह अंतिम अवसर था। उन्हें डर था कि स्वतंत्र भारत में पुरानी परंपराएं बदल सकती हैं, और उनके लोग कंगाल हो जाएंगे, उन्हें नकार दिया जाएगा और वे समाज तथा लोक सेवाओं से बहिष्कृत कर दिए जाएंगे।
29 जून 1946 को एक कामचलाऊ सरकार की घोषणा की गई और ब्रिटिश मिशन लंदन लौट गया, और अन्य कामकाज वॉयसराय के द्वारा निपटाने के लिए छोड़ गया।
15 जुलाई, 1946 को पूना में संग्राम की शुरूआत हुई, उसी समय बम्बई विधान सभा के पूना सत्र की शुरूआत हुई। 17 जुलाई, 1946 को ए.पी.ए. के साथ हुए अपने एक साक्षात्कार में डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर ने कहा था, ‘‘हम चाहते हैं कि यह देश उतनी ही प्रगति करे, जैसा कोई अन्य देश करता है। हम उसका रास्ता अवरुद्ध नहीं करना चाहते। हम मात्र यह चाहते हैं कि भावी भारत में हमारी स्थिति को सुरक्षा प्रदान की जाए’’।
‘‘इसे प्राप्त करने के लिए हम 16 मई के ब्रिटिश प्रस्तावों के विरुद्ध होने वाले प्रत्येक संघर्ष में हिस्सा लेंगे। यदि मुस्लिम लीग अंग्रेजों के विरुद्ध कोई सीधा संघर्ष शुरु करती है- तो मैं इस समय सिक्खों द्वारा उठाए गए कदम को पूरी तरह समर्थन दूंगा- फिर इस कार्रवाई में उन्हें भी हमारा समर्थन मिलेगा।’’
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ के प्रतिनिधियों द्वारा पूना में चलाए जा रहे सत्याग्रह आंदोलन का रूप अंततः उसी देशव्यापी संग्राम का रूप धारण कर लेगा ‘‘जैसा अगस्त, 1942 में कांग्रेस द्वारा आरंभ किया गया था’’।
‘‘हमारे संघर्ष की यह मात्र शुरुआत है,’’ डॉ. अम्बेडकर ने कहाः ‘‘जब यह संघर्ष कांग्रेसी आंदोलन का रूप लेने लगेगा, तो हम वही सब कुछ करेंगे जैसा अगस्त की घटनाओं के दौरान कांग्रेस ने किया था।’’