188 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
‘‘डॉ. अम्बेडकर ने पूना में अनुसूचित जाति द्वारा चलाए जा रहे प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘‘यह विरोध ब्रिटिश सरकार द्वारा पिछले 28 वर्षों के दौरान अनुसूचित जातियों को दिए गए हर तरह के आश्वासनों को तोड़े जाने के विरुद्ध है।’’
‘‘जब तक हमें एक अल्संख्यक वर्ग, जो संविधान में सुरक्षा और रक्षा का पात्र हो, की मान्यता नहीं मिल जाती, यह संघर्ष कहीं और, किसी भिन्न रूप में जारी रहेगा। तब प्रांतों को ब्रिटिश सरकार के अन्यायपूर्ण प्रस्तावों के विरुद्ध देशव्यापी संघर्ष शुरु करना पड़ेगा।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने प्रांतीय संगठनों को कोई दिशानिर्देश जारी किए हैं? कि अपने प्रदर्शन करने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए? डॉ. अम्बेडकर ने उŸार दियाः ‘‘हम यह प्रांतों पर छोड़ देंगे कि वे अपने संघर्ष के लिए कौन सा रास्ता चुनते हैं। इन सब पर सैद्धांतिक रूप से बात नहीं की जा सकती। प्रत्येक प्रांत की अपनी पृष्ठभूमि है और एक प्रांत में संघर्ष का प्रभावी रूप हो सकता है, कि दूसरे प्रांत के लिए उपयुक्त न हो’’।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि संघ का आशय पूना में संघर्ष जारी रखना था, जिसमें छोटे समूहों को सत्याग्रह के लिए भेजा जाता था। ‘‘पूना में बड़े-स्तर के संघर्ष में इस समय राशन की मुख्य समस्या है, डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा, ‘‘अन्यथा, हम बहुत बड़े स्तर का प्रदर्शन कर सकते थे’’।
यह पूछे जाने पर कि निकट भविष्य में क्या सत्याग्रह किए जाने की उनकी कोई योजना है, अनुसूचित जाति नेता ने कहा, किसी जनरल के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह युद्ध स्थल पर मौजूद रहे। मेरे विश्वासपात्र सहयोगी संघर्ष का काम देखेंगे और जब कभी किसी काम के लिए मेरी आवश्यकता होगी और मेरा संघर्ष में भाग लेना आवश्यक होगा, तो मैं वहां मौजूद हो जाऊंगा।
‘‘इस समय मुझे संघर्ष के बारे में एक व्यक्तिगत संदेशवाहक द्वारा पूना से प्रतिदिन अद्यतन जानकारी भेजी जाती है’’।
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डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने के लिए अस्थाई रूप से रविवार को पूना जाना तय किया था। उन्होंने कहा कि उन्हें समस्या के हल के लिए बातचीत हेतु गांधी जी अथवा किसी अन्य शीर्ष कांग्रेसी से कोई निमंत्रण नहीं मिला था।
उन्होंने आगे कहा कि फिर भी, संघ संबंधित दलों से बातचीत शुरू करना चाहता