58. श्री एटली द्वारा डॉ. भीमराव अम्बेडकर को लिखा गया पत्र - Page 218

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हिज मेजिस्टी की सरकार चिन्तित है कि संविधान सभा को केबिनेट मिशन के 16 और 25 मई के बयानों में उल्लिखित शर्तों के अनुसार कार्यवाही करने की पूर्ण संभावित स्वतंत्रता होनी चाहिए। वास्तव में हम स्वयं भी सोचते हैं कि एक महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक वर्ग होने के नाते अनुसूचित जातियों को अल्पसंख्यक सलाहकार समिति में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। किंतु आपने जो घोषणा करने के लिए कहा है, उसे अनुसूचित जातियों तक सीमित नहीं किया जा सकता और वह घोषणा उन सभी तत्वों की बात करेगी जिन्हें, हम समझते हैं कि, सलाहकार समिति में शामिल होना चाहिए। तो भी यह केवल हिज मेजेस्टी की सरकार की ओर से केवल एक राय मात्र होगी, जो अपरिहार्य रूप से विधान सभा की आजादी में हस्तक्षेप होगा और जिससे गंभीर असंतोष फैलेगा। इन परिस्थितियों में मैं यह विश्वास नहीं कर सकता कि ऐसी कोई घोषणा अनुसूचित जातियों के लिए महत्वपूर्ण होगी।

आपके दूसरे अनुरोध को देखें, तो मुझे अपने पिछले 15 मार्च को हाउस ऑफ कॉमन्स में दिए गए भाषण में वे शब्द दिखाई नहीं पड़ते, जिनकी आपने मुझे जानकारी दी है। मैंने कहा था कि हम अल्पसंख्यकों के अधिकारो के प्रति बहुत सचेत हैं और अल्पसंख्यकों को बिना डरे रहना चाहिए। ये हिज मेजेस्टी की सरकार के विचार थे, जिनका उल्लेख केबिनेट मिशन के 25 मई के बयान के पैरा 4 में किया गया है। मैं नहीं समझता कि उक्त पैराग्राफ में जो कहा गया था, इस स्थिति में हिज मेजेस्टी की सरकार द्वारा उसकी कुछ और व्याख्या करना बुद्धिमानी होगी।

आपका अंतिम अनुरोध है कि अंतरिम सरकार में अनुसूचित जाति के कम से कम 2 प्रतिनिधि होने चाहिए। मुझे खेद है कि मुझे ऐसा संभव होने की कोई उम्मीद नज़र नहीं आती। आपके संविधान सभा के लिए चुने जाने पर मुझे बहुत खुशी हुई थी।

@ जो इस प्रकार थेः

(1) यह खुलासा करना कि हिज मेजेस्टी की सरकार यह मानती है कि केबिनेट मिशन के बयान के पैरा 20 का अभिप्राय यह है कि अनुसूचित जाति वर्ग अल्पसंख्यक हैं।

(2) कि हिज मेजेस्टी की सरकार यह देखेगी कि प्रभुसŸा सौंपे जाने के लिए संधि पर हस्ताक्षर करने को सहमत होने से पूर्व अनुसूचित जातियों को संतोषजनक सुरक्षा प्रदान की जाती हो ताकि वे बहुसंख्यक वर्गों के डर से मुक्त होकर जीवन जी सकें।

(3) कि अंतरिम सरकार में अनुसूचित जातियों के कम से कम दो प्रतिनिधि होने चाहिए, जो अनुसूचित जाति संघ द्वारा नामित होने चाहिए।