198 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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श्री एटली द्वारा डॉ. भीमराव अम्बेडकर को लिखा गया पत्र
पेरिस, 1 अगस्त 1946
प्रिय अम्बेडकर,
मैंने आपके 1 जुलाई के पत्र और संबंधित संलग्न कागजात पर ध्यानपूर्वक विचार किया है।
मुझे खेद है कि मैं यह तथ्य स्वीकार नहीं कर सकता कि केबिनेट मिशन और वॉयसराय अनुसूचित जातियों के प्रति अन्याय कर रहे थे। 1945 में शिमला सम्मेलन में अपनाई गई नीति को उनके द्वारा संशोधित करने का कारण, जैसा आपने बताया, पिछले बसंत में आयोजित प्रान्तीय विधान सभाओं के चुनाव परिणाम थे। मिशन ने मतों के आंकड़ों का सावधानी पूर्वक अध्ययन किया और मैंने स्वयं भी उनकी जांच की है। हम मानते हैं कि इस तथ्य का यह आधार है कि वर्तमान चुनाव प्रणाली उन अनुसूचित जाति उम्मीदवार के साथ न्याय नहीं करती जो कांग्रेस के विरोधी हैं। दूसरी ओर, मुझे ऐसा कुछ प्रतीत नहीं होता कि प्रस्तुत आंकड़े आपके कहे अनुसार प्रारंभिक चुनावों में आपके संघ के उम्मीदवारों की उपलब्धियों का समर्थन करते हैं। जबकि मैं यहां इस मामले के विस्तार में नहीं जाना चाहता कि प्रारंभिक चुनाव अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 151 सीटों में से केवल 43 सीटों के लिए हुए थे। प्रारंभिक चुनावों में इन 43 सीटों पर अनुसूचित जाति संघ ने 22 उम्मीदवार खड़े किए जिनमें से केवल 13 उम्मीदवार शीर्ष स्थान पा सके।
अपने पत्र में आपने तीन विशिष्ट अनुरोध किए हैं। पहले अनुरोध के संबंध में,
1 जुलाई को डॉ. अम्बेडकर ने श्री एटली को एक लंबा पत्र भेजा था जिसमें उन्होंने अपने हालिया पत्राचार, एक ज्ञापन और एक भाषण तथा कुछ अन्य मदों से संबंधित प्रतिलिपियां संलग्न की थीं। डॉ. अम्बेडकर का यह पत्र श्री एटली को 17 जून को भेजे गए तार संदेश के क्रम में था जिसमें समान पृष्ठभूमि पर बात की गई थी। तार संदेश के लिए पृष्ठ 224 देखें।
* सŸा का हस्तातंरण, खण्ड VIII, सं. 105, पृ.170-72
* अपने 1 जुलाई के पत्र में डॉ. अम्बेडकर ने लिखा किः प्रारंभिक चुनावों‘ के परिणाम- जब भी भारत में इनका आयोजन हुआ सिद्ध करते हैं कि संघ द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवार शीर्ष पर पहुंचते हैं और कांग्रेसी उम्मीदवार सबसे निचले पायदान पर चले जाते हैं। एल/पीएंडजे/10/50ः एफ 81