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‘राजगृह’
दादर, बम्बई-14
12 अगस्त, 1946
प्रिय एटली,
आपके 1 अगस्त, 1946 के पत्र के लिए आपको धन्यवाद। मुझे आशा नहीं थी कि आप मेरे 1 जुलाई, 1946 के पत्र के उŸार के लिए समय निकाल सकेंगे। अतः मैं आपका आभारी हूं कि आपने मेरे उठाए गए मद्दों पर मुझे अपने विचारों से अवगत कराने के लिए समय निकाला।
मुझे खेद है कि मैं 1945 के शिमला सम्मेलन हिज मेजेस्टी की सरकार द्वारा अपनाई गई नीति के संशोधन के लिए न तो आपके औचित्य को स्वीकार कर सकता हूं और न ही अनुसूचित-जातियों के प्रति मिशन के बर्ताव के तरीके को स्वीकार कर सकता हूं। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि मि. अलेक्जेंडर के हाउस ऑफ कॉमन्स में दिए गए कपटपूर्ण बयान में कोई सच्चाई नहीं है कि अधिसंख्य अनुसूचित जातियां कांग्रेस के साथ हैं। यह केवल मेरा विचार नहीं है, अपितु भारत में रहने वाले प्रत्येक अंग्रेज का विचार है। यदि आप केवल सर एडवर्ड बेंथक से राय लें, जो इस समय इंग्लैण्ड में हैं, तो मुझे विश्वास है कि वह मेरा समर्थन करेंगे।
प्रारंभिक चुनाव में संघ की उपलब्धियों के परिणाम पर आपके विश्लेषण के संबंध में, मैं कह सकता हूं कि आपने परिस्थितियों का गलत आकलन किया है और मुझे खेद है कि कोई भी बाहरी व्यक्ति, जिसे तथ्यों के महत्व की जानकारी नहीं है या चुनाव के तरीकों का पता नहीं है, वह उचित स्पष्टीकरण के बिना उनका अभिप्राय नहीं समझ सकता। मिशन के विरुद्ध आरोप का मेरा मुख्य आधार यह था कि जब तस्वीर का दूसरा पहलू कांग्रेस द्वारा प्रस्तुत किया गया था, तो उनका कर्तव्य था कि वे मुझे बुलाते और मुझसे स्पष्टीकरण देने को कहते। मिशन ने ऐसा नहीं किया, जिसे करने के लिए वे कानूनी तौर पर बाध्य थे। यदि मैं अपना संतोषजनक स्पष्टीकरण