4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है, बल्कि इस समुदाय के अधिकारों की कैबिनेट मिशन द्वारा की गई अनदेखी के प्रति वहाँ आक्रोश भी है। लेबर पार्टी के समर्थकों में भी यह भावना तेजी से उभर रही है कि भारत की संवैधानिक समस्या का हल निकालने के लिए लेबर सरकार जो कदम उठा रही है क्या वह सही हैं? यह निश्चित रूप से फायदे की बात होगी, यदि ब्रिटिश जनता गलतफहमी का लबादा उतार फेंके और भारत के हालात की वास्तविकता से रूबरू हो, तो भारतीय समस्या का हल ढूंढ पाना कुछ आसान हो जाएगा।
डा.ॅ अम्बेडकर ने वंचित वर्गों के लिए अलग राजनैतिक प्रतिनिधित्व पर जोर देते हुए कहा है कि यही वह साधन है जिससे कांग्रेस के साथ विवाद का निपटारा किया जा सकता है और उनका विचार है कि एक बार ऐसा किए जाने पर कांग्रेस और अनुसूचित जातियों के बीच मतभेद नहीं रहेंगे। वह उन लोगों में से है जिन्होंने सवर्ण हिन्दुओं के अत्याचार और जातिगत विद्वेष को बचपन से भोगा है और हिन्दुओं की उच्च जातियों पर न तो आसानी से विश्वास कर सकते हैं और न ही अपने समुदाय के भविष्य को उनकी दया पर छोड़ सकते हैं। सवर्ण हिन्दुओं के अतिक्रमण से अपने अधिकारों का पर्याप्त कानूनी संरक्षण ही वह मार्ग है जो उनके कŸार्व्यपथ का मूलमंत्र है। उनका कहना है कि वह अपने समुदाय की समस्याओं के निवारण के लिए संवैधानिक साधन अपनाने हेतु प्रतिबद्ध हैं और इनसे न्याय न मिलने पर ही वह और रास्ता अपनाने का विचार करेंगे। यह कांग्रेस की ओर बढ़ाया गया समझौते का हाथ है।
अनुसूचित जातियों के नेता ने अनुसूचित जाति संघ और मुस्लिम लीग के बीच किसी गुप्त समझौते से इंकार किया है। इस उपमहाद्वीप पर सवर्ण हिन्दू कांग्रेस का शासन लादने से बढ़कर कोई गुप्त या खुला समझौता क्या हो सकता है, जिसका साझा खतरा उनके समुदाय और इस देश, दोनों को है? कांग्रेस नेतृत्व का चरित्र और बनावट ही ऐसी है, जिससे लोगों के अनेक वर्गों में भय व्याप्त है और यदि लीग और अनुसूचित जातियाँ खतरे को महसूस करते हैं और नजदीक आना चाहती हैं तो इसलिए कि वह साझा खतरे को महसूस करती हैं और सामान्य हित में और अपने लोगों की भलाई के लिए इसका डटकर सामना करना चाहते हैं। इस देश में दलित वर्गों का जीवन सदियों से गुलामी का पर्याय रहा है और वे अब इस नियति को बदलने के लिए कृतसंकल्प हैं। इसे वे कैसे कर पाएंगे इसका फैसला खुद उन्हें करना है न कि यह कांग्रेस को बताना है।
“डान“ [1]
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1 पुनर्मुद्रण : जय भीम : 1 जनवरी, 1947