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इंग्लैड में डॉ. अम्बेडकर के राजनैतिक मिशन के बारे में
1 जनवरी, 1947
सरकार और विपक्ष के अग्रणी सदस्यों के साथ ब्रिटेन में एक माह के व्यापक
विचार-विमर्श के बाद अनुसूचित जातियों के नेता डॉ. भीमराव अम्बेडकर अपनी
कर्मभूमि भारत लौट आए हैं। अपने समाज के मामले को ब्रिटिश जनता के सामने
पुरजोर तरीके से रखने के लिए उन्हांने लन्दन की यह यात्रा की थी। कांग्रेस ने
पिछले कई वर्षों से देश के भीतर मनमुटाव की गलत तस्वीर पेश की है और यहाँ
तक कि कैबिनेट मिशन भी इस गलतबयानी के झाँसे में आ गया है।
अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ इस समुदाय का प्रतिनिधि संगठन है और
इस संगठन की मजबूती और एकजुटता को छिन्न-भिन्न करने के लिए कांग्रेस बीच
में आ गई है। हाऊस ऑफ कामन्स में कैबिनेट मिशन के सदस्यों के इस बयान में कि
कांग्रेस अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व करती है, सच्चाई केवल इतनी ही है कि
अपार संसाधनों से युक्त इस ताकतवर राजनैतिक संगठन को अनुसूचित जातियों के लिए
आरक्षित कई सीटों पर कब्जा जमाने में सफलता मिली है। इसका कतई यह अर्थ नहीं
है कि विभिन्न विधानमंडलों में जीतकर आए लोग इस समुदाय के सच्चे प्रतिनिधि हैं।
ब्रिटेन में डॉ. अम्बेडकर का पहला काम इस मिथक को तोड़ना था और ब्रिटिश
राजनेताओं को सौंपे अपने ज्ञापन में उन्होंने यह कर दिखाया। ज्ञापन का ब्यौरा प्रकाशित
नहीं किया गया है, लेकिन स्वदेश लौटकर आने के बाद कराची हवाई अड्डे पर पत्रकारों
से की गई बातचीत से यह स्पष्ट है कि वह अपने मिशन में काफी हद तक कामयाब
रहे। उन्होंने एटली और चर्चिल सहित ब्रिटेन के कई गणमान्य लोगों से व्यक्तिगत स्तर
पर बातचीत की और अतिविश्वासपूर्वक कहा कि संप्रभुता के हस्तांतरण से सम्बन्धित
अधिनियम को पारित करते समय संसद में जब इस पर बहस होगी, तब अल्पसंख्यकों
के लिए जरूरी सुरक्षा उपायों के संबंध में उनकी वास्तविक आकांक्षाओं को जानने के
लिए ठोस कदम जरूर उठाए जाएंगे। डॉ. अम्बेडकर की बातों से यह जानकर प्रसन्नता
होती है कि ब्रिटिश जनता में अनुसूचित जातियों के प्रति न केवल हार्दिक सहानुभूति