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250 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय स्वतंत्र श्रमिक दल

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने अपने सहयोगियों से विचार-विमर्श के पश्चात् स्वतंत्र श्रमिक दल का संगठन किया। दल के संगठन का लक्ष्य भूमिहीनों, गरीब काश्तकारों, किसानों और मजदूरों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करके उनको हल करना था। इस पृष्ठ भूमि पर टाइम्स ऑफ इंडिया ने डॉ.अम्बेडकर से साक्षात्कार किया जिसमें उन्होंने दल के लक्ष्यों और उद्देश्यों को स्पष्ट किया।

स्वतंत्र श्रमिक दल की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं-संपादकगण

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स्वतंत्र श्रमिक दल

(15 अगस्त, 1936 के टाइम्स ऑफ इंडिया

से पुनर्मुद्रित

स्वतंत्र श्रमिक दल

प्रकाशन

सं.1

बंबई में एक नए राजनीतिक दल का संगठन किया गया है जिसका प्रयोजन नए संविधान के अंतर्गत विधानमंडल के दोनों सदनों के लिए बंबई प्रेसीडेन्सी के चुनाव लड़ना है। यह ‘‘स्वतंत्र श्रमिक दल’’ के नाम से जाना जाता है और इसका संगठन दलित वर्गों के नेता डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने किया है।

ऐसा प्रतीत होता है, कि मूलतः डॉ. अम्बेडकर का विचार अनन्य रूप से दलित वर्गों का दल बनाने का था। लेकिन इसका कार्यक्रम विशिष्ट रूप से इन वर्गों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिखा गया था लेकिन अन्य वर्गों के अपने मित्रों की इच्छा पर उन्होंने दल को एक सामान्य नाम देने की सहमति जताई और कार्यक्रम को अधिक सामान्य शब्दों में लिखा। पार्टी की ओर से कोई भी व्यक्ति पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ सकता है और विधानमंडल में इस प्रयोजन के लिए निर्मित कार्यक्रम के अनुसार कार्य कर सकता है। व्यापक कार्यक्रम

टाइम्स ऑफ इंडिया के एक प्रतिनिधि के साथ साक्षात्कार में डॉ. अम्बेडकर ने घोषणा कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि यह समय ऐसा नहीं है कि दलों