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को सांप्रदायिक रूप में संगठित किया जाए उन्होंने अपने दोस्तों की इच्छाओं से सहमत होते हुए ‘‘दल का नाम और कार्यक्रम को भी व्यापक बना दिया है ताकि दलित वर्गों और अन्य वर्गों में राजनीतिक सहयोग का मौका बना रहे’’। पार्टी के केंद्र में अब भी दलित वर्गों के पंद्रह सदस्य होंगे। परंतु अन्य वर्गों के सदस्य दल में प्रवेश के लिए स्वतंत्र होंगे।
डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा कि उन निर्वाचन क्षेत्रों में दलित वर्गों के मतदाताओं की बड़ी संख्या है जहां पर उनके लिए सीटें आरक्षित नहीं है, और वहां पर उनके लिए यह संभव होगा कि वे अपने मतदान किसी भी ऐसे उम्मीदवार को दे दें, जो पार्टी का सदस्य बनना पसंद करता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दल की सदस्यता सभी धर्मों और संप्रदायों के लिए
खुली है, हालांकि दलित वर्गों के मत विधि के कारण ऐसे धर्मों और संप्रदायों से संबंधित लोगों को उपलब्ध कराए जा सकते हैं, जिन्हें सामान्य मतदाताओं में शामिल किया गया है। पहले ही अन्य वर्गों के कुछ लोगों ने दल में आने की इच्छा जताई है और अन्य जो इस अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं वे दल के कार्यालय में पार्टी के सचिव से पत्र-व्यवहार कर सकते हैं।
यह पूछे जाने पर कि स्वतंत्र श्रमिक दल की संबद्धता क्या होगी डॉ.अम्बेडकर ने यह संकेत दिया कि दल विधानमंडल के सदस्यों का विविध समूह नहीं होगा जो निर्वाचित होने के पश्चात् प्रत्येक अपने आप, विधानमंडल में एक-दूसरे की सहायता करेंगे। और मतदान करने के लिए सहमत होंगे। पार्टी का आधार उसका निर्वाचन क्षेत्र होगा, और इसके सदस्यों ने वहां से चुनाव इसी प्रकार लड़ा होगा और निर्वाचन क्षेत्र को सामान्य और स्पष्ट रूप से परिभाषित कार्यक्रम बनाए रखने का और पार्टी
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यह पूछने पर कि दल के लिए उस विशेष नाम को चुनने के लिए किसने प्रेरित किया, डॉ. अम्बेडकर ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक अन्य राजनीतिक दल से यह दल स्वतंत्र होगा, हालांकि यह दल अन्य राजनीतिक दलों से जहां सहयोग संभव होगा, सहयोग के लिए तैयार रहेगा। इस मायने में यह दल श्रमिक संगठन है क्योंकि इसका कार्यक्रम मुख्य रूप से श्रमिक वर्गां के कल्याण को बढ़ाने से संबंधित है। दल ऐसी सही विचारधारा में विश्वास करता है जो उस वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त हो जिनके हितों को दल सर्वोपरि मानता है। दलित वर्गों के स्थान पर लेबोदर (Labodur) शब्द का प्रयोग किया गया है क्योंकि श्रमिकों में दलित वर्ग भी शामिल हैं।