69. स्वतंत्र श्रमिक दल - Page 277

258 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कांग्रेस जनता के हितों की रक्षा का दावा करती है और यही ध्येय स्वतंत्र श्रमिक दल का है। लेकिन, डॉ. अम्बेडकर न आगे कहा, स्वतंत्र श्रमिक दल को ऐसा लगता है कि कांग्रेस अपनी रचना के कारण ही जनता की सेवा के लिए स्वतंत्र नहीं है। कांग्रेस एक विषम जातीय निकाय है जिसमें शोषक और शोषित दोनों ही शामिल हैं अज्ञैर यह निश्चित है कि कांग्रेस में शामिल शोषक, संगठन को जनता के लिए काम नहीं करने देंगे।

दलित वर्गों के नेता ने आगे कहना जारी रखा कि राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करने के प्रयोजन के लिए शोषकों और शोषितों का संगठन आवश्यक हो सकता है, परंतु सामाजिक पुनर्रचना के प्रयोजन के लिए शोषितों और शोषकों की मिली-जुली सामान्य पार्टी बनाना जनता को धोखा देना था।

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डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की राय में, स्वतंत्र श्रमिक दल किसी भी व्यक्ति और हर किसी को मिलाकर विधानमंडल में अपनी शक्ति को बढ़ाना नहीं चाहता था। दल विषम जातीय तत्वों का समूह बनने से बचना चाहता था।

दल उन्हें सदस्यता देता है जो कार्यक्रमों को बिना शर्त स्वीकार करते हैं और जिनकी कोई अन्य संबद्धता नहीं है। डॉ. अम्बेडकर ने कहा, दल ने यह निर्णय किया है कि पार्टी के जितने उम्मीदवार खड़ा करना संभव है। उससे कम उम्मीदवार वह आगामी चुनावों में खड़े करेगी।

हॉलांकि विधानमंडलों में पर्याप्त कार्य करना शेष था, परंतु दल के विचार में विधान-मंडलों के बाहर जनता को शिक्षित करना, उनके समक्ष ठीक विचारधारा रखना और विधानमंडलों के माध्यम से राजनीतिक कार्रवाई के लिए उसे संगठित करना अधिक महत्वपूर्ण कार्य था।

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डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने सोचा कि स्वतंत्र श्रमिक दल जैसी पार्टी आवश्यक है सभी मजदूरों, कृषकों और निम्न, मध्य वर्गों के लोगों से बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने की अपील की ताकि यह जन संगठन बन जाए। उन्होंने यह भी घोषित किया कि जनसाधारण को शिक्षित करने और प्रचार-प्रसार करने के प्रयोजन के लिए आठ सदस्यों की एक समिति गठित कर दी गई है।