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सारणी- XCV
प्रांतवार
प्रांत प्राथमिक स्तर मिडिल स्तर उच्च हाई स्तर कालेज स्तर
(1) (2) (3) (4) (5)
मद्रास 7,276 230 14 2
बंबई 5,739क 159(क) 1(क) शून्य
बंगाल 28,086 49(ख) 5(ख) 3(ख)
संयुक्त प्रांत 2,204 8 1शून्य शून्य
पंजाब 398 2शून्य शून्य शून्य
बिहार और 2,210(ग) शून्य शून्य
उड़ीसा
केंद्रीय प्रांत 521(ग) 3(ग) शून्य शून्य
(क) आदिवासी पर्वतीय और जरायमपेशा जातियां सम्मिलित हैं। (ख) समस्त पिछड़े वर्ग सम्मिलित हैं। (ग) लड़कों और लड़कियों के स्कूलों में लड़कियों की संख्या।
यह बहुत ही खेदजनक स्थिति है। सन् 1929 और अब तक हो सकता है कुछ सुधार हुआ हो परंतु इस प्रगति को आंकने के लिए सही आंकड़े नहीं हैं। लेकिन यह तथ्य कि भारत सरकार अपने 1943 के संकल्प के अनुपालन में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित रिक्तियों का 8 1/2 प्रतिशत का कोटा भी सरकार के विभागों में भर नहीं पाया है इस बात का संकेत है कि सन् 1929 में विद्यमान अनुसूचित जातियों की शिक्षा की स्थिति में इस अंतराल के दौरान कोई पर्याप्त बदलाव नहीं आया है।
अनुसूचित जातियों की स्थिति में सुधार करने के दृष्टिकोण से और भारतीय समाज में उनके प्रतिकूल भाव रखने वाले तत्वों से सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के दृष्टिकोण से अनुसूचित जातियों के लिए प्राथमिक शिक्षा की अपेक्षा उच्च शिक्षा विशेष रूप से कालेज शिक्षा अधिक महत्वपूर्ण है। अनुसूचित जातियों का कल्याण समग्रतः सहानुभूतिपूर्ण लोक सेवा पर निर्भर है और यदि लोक सेवा को सहानुभूतिपूर्ण होना है तो यह राष्ट्र के राष्ट्रीय जीवन के भिन्न तत्वों का प्रतिनिधित्व करने वाली और विशेष रूप से अनुसूचित जातियों की होनी चाहिए। इसके अलावा, लोक सेवा