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शाला और कार्यालय
तीन ऊपरी मंजिलः पहली मंजिल पर
कार्यालय और 13 दो कक्ष वाली कोठरियां
2 शेष बची प्रत्येक मंजिल पर
कुल 2,88,000/-
भूमि की लागत 37,000/-.
कुल जोड़ 3,25,000/-
केंद्र की अनुमानित लागत 3,25,000/- रुपये है। यह लागत निस्संदेह सामान्य समय पर प्रचलित कीमतों पर आधारित है। इन संरचनाओं को ऐसे डिजाइन किया गया है ताकि ये त्रि-प्रयोजनीय रहें। पहला प्रयोजन है एक छत के नीचे अछूतों के कल्याण के संवर्धन की सभी गतिविधियों को लाना ताकि इनमें समन्वय बनाए रखा जा सके और मेहनत के अपव्यय को रोका जा सके। दूसरा प्रयोजन है अछूतों को एक ऐसा स्थान प्रदान करना जिसे वे ज्ञान और प्रेरणा के केंद्र के रूप में देख सकें, एक ऐसा स्थान जो उन्हें विचारों का आदान-प्रदान, सामाजिक और धार्मिक कार्य संपन्न करने के लिए मिलन-स्थल प्रदान कर सके और वह सांस्कृतिक केंद्र के रूप में कार्य करे जिस पर वे गर्व कर सकें। तीसरा और अत्यधिक महत्वपूर्ण प्रयोजन है केंद्र को स्थायी आय का स्रोत प्रदान करना ताकि उसे जारी रखा जा सके और गतिविधियां निरंतर चलती रहें। अधिकांश भवनों को किराए पर उठाने के इरादे से बनाया गया है। उनसे किराया आएगा जिसके परिणामस्वरूप केंद्र चलता रहेगा और इससे केंद्र आत्मनिर्भर बनेगा।
| kjr | d | s j | kt | kv | ksa v | kSj y | ksx | ksa l | s v | ihy |
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यह सार्वजनिक रूप से मान्य तथ्य है कि, लोकोपकारी दृष्टिकोण से, अछूतों की वर्तमान स्थिति हिंदू सभ्यता पर एक गंभीर कलंक है और भारतीय राष्ट्र की चौतरफा प्रगति में एक सबसे बड़ी बाधा है। इसके हल के लिए सभी संबंधित पार्टियों की हिम्मत, प्रवीणता, स्रोतों और प्रबंध-शक्ति की जरूरत है। समाज सुधारकों और राजनीतिज्ञों के प्रयासों के बावजूद अभी तक की प्रगति संतोषजनक नहीं है। वास्तव में, यह कहा जा सकता है कि अभी तक केवल समस्या की सतह को ही छुआ जा सका है। अछूत अभी भी पहले ही की तरह पिछड़े हुए हैं। उनकी सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और राजनीतिक आकांक्षाओं की बढ़ोŸारी को हर कदम पर कुचला जाता है