288 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और दूसरों के रहम पर जीने की आदत को कपटपूर्ण रूप से बनाए रखने के कारण, अछूत अपनी लड़ाई लड़ने में भी अनुपयुक्त हो सकते हैं। ऐसा मेरा विश्वास है कि उनके रास्ते के सभी रोड़ों को हटाने और उन्हें वास्तविक रूप में चिरकालीन दासता से स्वाधीन करने की ताकत उनके भीतर से ही आएगी। इसकी वजह यह है कि अछूतों का यह आंदोलन अंतर्मन का आंदोलन है, जिसके कारण मुझे पक्का यकीन है कि इससे इसे सहायता और प्रोत्साहन मिलेगा और यह सफल होगा।
यह कहा जा सकता है कि यदि अछूत अपनी मुक्ति के कार्य को शुरू करने के लिए उत्सुक हैं तो उन्हें इसे आर्थिक सहायता प्रदान करने का दायित्व भी उठाना चाहिए। मुझे यह कहने में खुशी है कि बंबई के अछूत अपने आंदोलन के इस पक्ष के प्रति पूर्ण रूप से सचेत हैं। उन्होंने पहले ही प्रति व्यक्ति अभिदान देकर समाज केंद्र के भवन निर्माण के लिए निधियां उगाही हैं। इस महत्वपूर्ण आंदोलन के लिए प्रत्येक पुरुष और महिला अपना योगदान देने को तैयार है। कुछेक पहले ही पैसा दे चुके हैं और बहुत-से शीघ्र ही दे देंगे। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि अछूत अपने बलबूते पर सारा धन नहीं जुटा पाएंगे। उन्हें अपने ऊपर निर्भर रहने के लिए कहना कठोरता होगी। केंद्र का निर्माण भारत के राजाओं ओर लोगों की सहायता के बिना संभव नहीं है। अछूतों को यह बताना कि अपने भार को वे स्वयं ढोएं यह ठीक है। परंतु क्या यह उचित होगा? क्या भारत के राजाओं और लोगों का अछूतों की दयनीय स्थिति के संबंध में कोई दायित्व नहीं है? यदि है तो क्या यह सही है कि वे अछूतों को इस आधार पर सहायता नकार दें कि अछूतों ने अपने उद्धार का कार्य स्वयं अपने ऊपर लिया है? मुझे पक्का विश्वास है कि भारत के राजाओं और लोगों को अछूतों द्वारा दर्शाए गए आत्म-सम्मान की भावना की कद्र है और इस संबंध में वे ऐसा ही रवैया अपनाएंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके भीतर अछूतों के ऊपर लादे गए धार्मिक तिरस्कारों जैसे अन्यायों को खत्म करने के लिए साधन मुहैया कराने की तीव्र उत्सुकता है।
अछूतों का उत्थान एक संयुक्त जिम्मेवारी होनी चाहिए जिसमें अछूत इस आंदोलन को एड़ी चोटी का पसीना एक करके दृढ़ता और प्रेरणा प्रदान करेंगे और भारतीय समुदाय इस आंदोलन के लिए अपेक्षित धन की भरपाई करेगा। इसी कारण मैं भारत के राजाओं और लोगों से इस आंदोलन के लिए विŸाय सहायता की अपील करता हूं।
मुझे विश्वास है कि भारत के राजा और लोग अवश्य ही यह महसूस करेंगे कि राष्ट्रीय पुनरुद्धार और भारत के पुनर्निर्माण में अछूतों का उत्थान कितना जबर्दस्त और सम्मोहक बल प्रदान करेगा। समाज केंद्र अवश्य ही अछूतों को इस प्रकार