75. परिशिष्ट-III द केबिनेट मिशन - Page 353

334 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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‘‘19 फरवरी, 1946 को, विद्रोह आरंभ होने के अगले दिन, लॉर्ड पेथिक लॉरेन्स ने हाउस ऑफ लॉर्ड्स में घोषणा कि ‘‘सर्वोच्च महत्व को ध्यान रखते हुए, न केवल भारत और ब्रिटिश राष्ट्रमंडल बल्कि विश्व शांति के लिए, भारतीय जनमत के नेताओं के साथ विचार-विमर्श के सफल परिणाम के लिए, ब्रिटिश सरकार भारत में केबिनेट मंत्रियों का एक विशेष मिशन भेजेगी, जिसमें सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया (लॉर्ड पेथिक लॉरेन्स), प्रेजिडेन्ट ऑफ बोर्ड ऑफ ट्रेड (सर स्टेफार्ड क्रिप्स), और फर्स्ट लॉर्ड ऑफ एडमिरलटि (श्री ए. वी. अलेक्जेंडर) होंगे जो इस मामले में गवर्नर-जनरल के सहयोग से कार्य करेंगे। इसी प्रकार का वक्तव्य हाउस ऑफ कॉमन्स में श्री क्लिमेंट एटली द्वारा दिया गया था।

लॉर्ड पेथिक लॉरेन्स की अध्यक्षता में केबिनेट मिशन भारत की समस्या का हल खोजने के लिए 23 मार्च, 1946 को भारत आया इसकी गतिविधियों और आगामी घटनाओं को इस पृष्ठभूमि में समझा जा सकता है ‘‘कि लेबर सरकार का शक्ति सौंपने के लिए सर्वोŸाम संभव प्रबंध करने के पश्चात् यथा शीघ्र ही भारत छोड़ने का पक्का निर्णय था’’। पार्टी नेताओं से बातचीत करने पर कई सम्मत हल नहीं निकला। 16 मई, 1946 को मिशन ने अपनी ही योजना प्रस्तुत की। पाकिस्तान के मसले को पूरी तरह जांचकर उसने यह निष्कर्ष निकाला कि न तो बड़ा और न ही छोटा पाकिस्तान का प्रभुता-संपन्न राज्य अन्य विचारों को ध्यान में रखते हुए-जैसे प्रशासनिक, आर्थिक और सेना और संचार तथा भारतीय राज्यों से संबंधित विचारों के कारण, सांप्रदायिक समस्या का स्वीकृत हल प्रदान कर सकेगा और इस प्रकार पाकिस्तान बनाने की सलाह नहीं दी गई। लेकिन मुसलमानों की यह आशंका कि उनकी संस्कृति और राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन पर हिंदू हावी हो सकते हैं उसे नजरंदाज नहीं किया जा सका। जहां तक भारतीय राज्यों का संबंध है मिशन का विचार यह था कि ब्रिटिश भारत द्वारा स्वतंत्रता प्राप्त होने पर उनके ऊपर सर्वोपारिता न ब्रिटिश क्राउन बनाए रख सकेगा न ही यह नई सरकार को हस्तांतरित की जा सकेगीः फिर भी राज्य भारत की नई परिस्थितियों के साथ सहयोग करने के लिए तैयार थे। उनके

  1. भारतीय संविधान के भाषण और प्रलेख, खंड I सर मौरिस ग्वयर और ए.अप्पादौराई द्वारा चयनित प्रस्तावना पृष्ठ vii (1957)।