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340 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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केबिनेट मिशन के समक्ष जगजीवन राम, राधानाथ दास और पृथ्वी सिंह के साक्षात्कार

‘‘जगजीवनराम, राधानाथ दास और पृथ्वी सिंह आजाद अखिल भारतीय दलित वर्ग संघ के प्रतिनिधि के रुप में एक साथ उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि संघ ऐसे किसी भी प्रस्ताव का विरोध करेगा जो देश की अखंडता को हानि पहुंचाए गया कि उसके दृष्टिकोण में भारत का पाकिस्तान और हिंदुस्तान में विभाजन अल्पसंख्यक समस्या का हल प्रदान न करके उल्टे नई समस्याएं खड़ी करेगाय कि संघ एक से अधिक संविधान सभा स्थापित करने का भी विरोध करता है। नए संविधान में अल्पसंख्यकों की भाषा, संस्कृति आदि और अनुसूचित जातियों के अधिकारों और हितों को संरक्षित करने के लिए उपबंध होने चाहिए। अंतरिम सरकार के संबंध में दलित वर्ग संघ एक समुदाय को महत्व देकर दूसरे को उसके जायज हिस्से से भी वंचित करन का विरोध करता हैय लेकिन यदि महत्व देने का निर्णय होता है तो अनुसूचित जातियों की भी महत्व दिया जाना चाहिए। अंतरिम सरकार विधानसभा के प्रति उŸारदायी होनी चाहिए और रक्षा, विŸा और विदेशी मामले मंत्रिमंडल को सौंप दिए जाने चाहिए, जिनके सदस्यों का निर्वाचन विभिन्न प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा होना चाहिए। अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति-निधित्व के लिए विशेष उपबंध किए जाने चाहिए और प्रांतीय विधान सभाओं के अनुसूचित जातियों के सदस्यों को एक निर्वाचकगण बनाना होगा जो केंद्रीय सरकार में शामिल करने के लिए व्यक्तियों का चयन करेगा।

जगजीवन राम ने कहा कि अनुसूचित जाति परिसंघ (डॉ. अम्बेडकर के नेतृत्व में) और दलित वर्ग संघ लीग में अंतर यह है परिसंघ के अनुसार अनुसूचित जातियां हिंदू नहीं है बल्कि अपने आप में धार्मिक अल्पसंख्यक हैं जबकि संघ का कहना यह है कि अनुसूचित जातियों के लोग अपने आपको हिंदू मानते हैं ओर उन्होंने हिंदूत्व के आंदोलन के लिए बहुत बलिदान दिया है। दलित वर्ग संघ ने विधान सभाओं और सेवाओं में विशेष प्रतिनिधित्व के लिए बल दिया ताकि अनुसूचित जातियां अपने आपको देश के अन्य लोगों के स्तर तक लाने के योग्य हो सकें।

(भारत में शक्ति-अंतरण, पृष्ठ 244-45)

1 उद्धत, खैरमोड़े खंड 8, पष्श्ठ 64-65