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परिशिष्ट- IX
राज्यों का क्या होगा
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“ डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने देशी राज्यों और अंतरिम सरकार दोनों को समय पर चेतावनी दी है। भारतीय संघ से अलग राज्यों का कोई अस्तित्व नहीं हो सकता।
संविधानद्धि होने के नाते, डॉ. अम्बेडकर ने आधिकारिक रुप में अंतरिम सरकार को कहा कि वह ब्रिटिश सरकार को अधिसूचित करे कि भारत के लोग कभी भी किसी देशी राज्य को प्रभुता संपन्न स्वतंत्र राज्य के रुप में मान्यता नहीं देंगे।
परंतु यथातथ्य कानून से कुछ अधिक की आवश्यकता होगी ताकि राज्यों के शासकों को उनकी मूर्खता से और उनकी प्रजा को उनके परिणामों से रोका जा सके।
सुस्पष्ट राज्य नीति के बारे में अंतरिम सरकार की क्या शस्तियां है? शस्तियां चौहरी हैंः भारतीय लोगों की इच्छा, राज्य के लोगों की इच्छा, प्रजातंद्ध का वर्तमान प्रभाव और शासकों की अंधाधुंध निरंकुशता।
यह तथ्य है कि सभी षासक प्रजातंत्र के विरुद्ध नहीं हैं। लेकिन तब ये शासक संघ के समर्थक हैं।
सर सी.पी. रामास्वामी अध्यर ने शब्दा डम्बर रुप में कहा, “ वेजो हमारे साथ नहीं है, वे हमारे विरोध में हैं ” ।
यह भारतीय संघ का मार्गदर्श नियम होना चाहिए। सर सी.पी. रामास्वामी का व्यवहार तथापि क्षणिक है। वे स्वयं ट्रावनकोर के भ्रमण पर है। वे एक वर्ष, दो वर्ष या पांच वर्ष वहां रुकें। लेकिन उन्हें कहां से जाना ही है। ट्राइवन कोर की ओर से बोलने का उनका दावा अत्यधिक कमज़ोर है। कोचीन के महाराजा की परिपक्व बुद्धिमानी शीघ्र ही ट्रैवणकोर के भगिनी राज्य पर प्रभावी होगी।
अधिक गंभीर खतरा हैदराबाद का है, जो भारत के केंद्र में फैल रहा है, जहां कोई आकस्मिक प्रधान मंत्री नहीं बल्किस्वयं शासक राजा संघ में प्रवेश को रोक रहा है। हमें यह भूलना नहीं चाहिए कि निजाम ने प्रजातंत्र के सभी दावों को नकार