84. परिशिष्ट-IX राज्यों का क्या होगा - Page 391

372 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

दिया है। यहां तक कि उसने जो प्रतिनिधि संस्थाएं अपने अधिकार क्षेत्र में स्थापित की हैं वे भी प्रजातंत्र का खंडन हैं। विधानमंडल को सांप्रदायिक व्यवस्था से दूषित प्रकार्यात्मक प्रतिनिधित्व से विकृत कर दिया है। मुख्य मंत्री की नियुक्ति और उसे निकालने का काम परम महामान्य के प्राधिकार और सनक पर किया जाता है।

इन चीज़ों पर अतीत में ध्यान नहीं दिया गया है। निकटतम भविष्य नें भारतीय संघ में आने के लिए हैदराबाद के लोगों को बहुत बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।

कांग्रेस नेताओं ने राज्यों की स्थिति पर अपने आपको अत्यधिक पर्याप्त रुप में स्पष्ट कर दिया है। इस या उस दीवान से मिल जाने के लिए कहने से कोई प्रयोजन पूरा नहीं होगा।

उन्हें स्वयं मजबूती और कृतसंकल्प के साथ अपनी कथनी को कार्यान्वित करने की कोशि करनी होगी। देशी राज्य भारत के अभिन्न अंग हैं। संघ उन्हें अपने में अलगाव के टापुओं के रुप में अस्तित्व में रहने की अनुमति नहीं दे सकता।

देशी राज्यों के लोगों ने यह घोषित किया है कि वे संघ के साथ हैं। इस निर्णय को तत्काल प्रभावी बनाना चाहिए। पुनर्मिलन के लिए ब्रिटिश वायसराय या राजाओं पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। वास्तव में, यह कमजोरी की घबराहट ही होगी यदि इतना मजबूत मामला होने के बावजूद भी कांग्रेसी नेता यह महसूस करें कि उन्हें अपने प्राधिकार को स्थापित करने के लिए किसी की सहायता आवश्यकता है।

जब संविधान सभा की बैठक होगी तब तक अधिकांश देशी राज्य उसमें सम्मिलित हो चूके होंगे। जब से चेम्बर ऑफ प्रिंसेस अस्तित्व में आया है यह एक असाधारण लक्षण है, चूंकि इससे पहली बार देशी राज्यों में, प्रायः जिसे राजसीक्रम प्रिंसली आर्डर के गलत नाम से पुकारा जाता है, फूट पड़ी है जिसने इन्हें भारतीय संघ के पक्ष में बांट दिया है।

कांग्रेसी नेताओं और अन्य राष्ट्रवादियों को इस स्थिति का लाभ उठाना चाहिए और अडि़यल राजाओं का सामना करने के लिए पर्याप्त शक्ति विकसित करनी चाहिए।

अब तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता है चूंकि पाकिस्तान राज्य बनना अवश्यभावी है। श्री जिन्ना निष्चित रुप से इस अवसर का लाभ उठाने में नहीं चूकेंगे और किसी और को लाभ उठाने नहीं देंगें।

देशी राज्यों की संप्रभुता पर श्री जिन्ना का वक्तव्य निराधार हस्तक्षेप है। श्री जिन्ना ने अपने पाकिस्तान राज्य की मांग की थी वह उन्हें मिल गया है। इसके