89. धर्म एवं पुरोहितों को समुचित नियंत्रण में लाया जाए। - Page 407

388 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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धर्म एवं पुरोहितों को समुचित नियंत्रण में लाया जाए।

लेखक

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, एम.ए., पी.एच.डी.,

डी.एस.सी., बार-एट-लॉ, एम.एल.सी.

बेलगाँम में प्रवास के दौरान मैंने बम्बई में कुछ पारसियों द्वारा संघ के गठन हेतु एक आन्दोलन आरम्भ करने के बारे में सुना है, जिसका मुख्य उद्देश्य यह माना गया है कि भारत के अधिसंख्य शिक्षित युवा इसे तत्परतापूर्वक स्वीकार करेंगे। मुझे नहीं लगता कि पारसी जन-समुदाय की कार्यपद्धति पर चर्चा हेतु मुझे आमंत्रित किया जाएगा। लेकिन मेरे पारसी मित्र आश्वस्त रहें कि हिन्दू पुरोहित वर्ग किसी भी रूप में पारसी पुरोहित वर्ग से नैतिक, शैक्षिक अथवा किसी अन्य प्रकार से औसत पारसी पुरोहित वर्ग के सदस्य से श्रेष्ठ नहीं है। चक्रगति में गतिरोध

विरासती हिन्दू पुरोहितों के विरुद्ध दोषारोपणों की संख्या अत्याधिक एवं भयावह है। वह हमारी सभ्यता के चक्र में एक बाधा है। मनुष्य पैदा होता है, विवाह करता है, एक परिवार का मुखिया बनता है एवं तब समय आने पर मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। पुजारी जिन्न के रूप में दिखाई देता है। उसके स्वयं द्वारा बनाये शास्त्रों एवं स्मृतियों के अनुसार नियत क्रूर नियमों के अतिक्रमण की सजा क्रूरता से दी जाती है जिसे 99 प्रतिशत बर्दाश्त नहीं कर सकते। शैतान पुरोहितों में समाज से निर्वासन या बहिष्कार किये जाने का हथियार स्वयं द्वारा निर्मित किया हुआ है। इस का निष्पादन पुजारी द्वारा निष्ठुरता, निर्ममता एवं क्रूरता से किया जाता है। मुझे यह स्वीकार करना होगा कि काम चलाऊ ब्राह्मण विधि विधान मानवता का एक घृणित प्रतिरूप है। उसके प्रति हमारी जो छवि है, उसे वह भी जानता है। वह अदृश्य शक्तियों एवं निःसहाय व्यक्तियों के बीच बिचौलिये की लज्जाजनक भूमिका निभाता है और इसके माध्यम से आजीविका चलता है। दार्शनिक भलीभाँति पूछ सकते हैं कि क्या यह भ्रष्ट वर्ग दिल से स्वीकार्य है? लेकिन इस प्रश्न का जो भी उत्तर हो, समाज के महत्त्वपूर्ण अवयवों पर आश्रित एवं उनका भक्षण करने वाले परजीवी को बिना रोक एवं नियंत्रण के अब और अधिक कार्य करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हम