22 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
में निम्नलिखित का उल्लेख किया जा सकता है (1) सर्वोच्चता को आरक्षित विषय मानना, (2) सेना पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त करने की असंभावना और (3) विŸाय विषयों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त करने की असंभावना। यद्यपि अपूर्णताएं गंभीर हैं परन्तु आने वाले समय में वे गायब हो सकती हैं अथवा हटाई अथवा विलोपित की जा सकती हैं। ऐसी स्थिति अन्तर्निहित दोषों के साथ नहीं है। इन दोषों को नहीं हटाया जा सकता जब तक सम्पूर्ण संघीय संविधान ही न हटाया जाए। संविधान के बारे में किसी को यह झगड़ा नहीं करना चाहिए कि इसमें कतिपय अपूर्णताएँ हैं। व्यवहारतः पारस्परिक समझ से इन अपूर्णताओं को दूर किया जा सकता है और अनुभव यह बताता है कि ऐसा करना असंभव नहीं है यदि अपूर्णताएँ ऐसी हैं कि उन्हें व्यवहार में हटाया नहीं जा सकता, तो पुनरीक्षा का समय आने पर उन्हें बदला जा सकता है। परन्तु मामला सर्वथा भिन्न हो जाता है जब संविधान ऐसे सिद्धांतों पर आधारित है जो दोषयुक्त हैं और जो इसे प्रगति करने नहीं देते। संघीय संविधान अपनी अवधारणा और अपने आधार की दृष्टि से ही त्रुटिपूर्ण है।
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अपनी बात का समापन करते हुए डॉ अम्बेडकर ने कहाः “इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी की राय में गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट में संघीय योजना को लागू करने का हर संभव साधन से विरोध किया जाना चाहिए। नए संविधान का संघीय हिस्सा घातक विष की तरह अस्वीकार किया जाना चाहिए। यदि कांग्रेस नए संविधान का बहुमत से विरोध करती है तो इसे इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी पूर्ण समर्थन देगी। यदि कांग्रेस पार्टी में बहुमत प्रतिक्रियावादी तत्वों के प्रभाव में आ जाता है और श्री सुभाष चन्द्र बोस अपनी बात पर कायम रहने का निर्णय करते हैं तो इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी उनकी पार्टी से हाथ मिलाएगी। हमारी पार्टी उस पार्टी अथवा पार्टियों के समूह से सहयोग करेगी जो नए संविधान के संघीय हिस्से का हर संभव तरीके से विरोध करने के लिए वचनबद्ध हैं।
युनाइटेड प्रेस” ख्1,
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1 द बॉम्बे क्रॉनिकल, दिनांक 21 जुलाई, 1938