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कांग्रेस का अस्पृश्यों को हटाने का प्रयास
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भारतीय राजनीति के इतिहास में 12 नवम्बर, 1930 एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण दिन था, इस दिन स्व. महामहिम राजा जार्ज पंचम ने औपचारिक रूप से भारतीय गोल -मेज सम्मेलन का उद्घाटन किया। भारतीयों की दृष्टि से यह एक महत्त्वपूर्ण घटना थी, यह पहला अवसर था जब भारतीयों के अधिकारों को मान्यता प्रदान की गई थी। इण्डियन नेशनल कांग्रेस (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस) केवल ऐसी संस्था थी जिसने इस सम्मेलन में भाग नहीं लिया। सम्मेलन का कार्य नौ समितियों में विभाजित किया गया था, जिसमें से एक अल्पसंख्यक समिति थी।
वर्ष 1919 का अधिनियम, जो दलित वर्गों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देता है ने वास्तव में कुछ नहीं किया। यह केवल एक काल्पनिक दावा था। अतः मैनें एक ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसमें मैंने निम्नलिखित हेतु तर्क दिए :
(1) दलित वर्गों हेतु समान नागरिकता
(2) समान अधिकारों का स्वतंत्रतापूर्वक उपभोग
(3) भेदभाव के विरुद्ध संरक्षण
(4) दलित वर्गों के लिए पर्याप्त राजनीतिक शक्ति ताकि विधायी एवं कार्यकारी कार्यवाही को अपने कल्याण के लिए क्रियान्वित कर सके इसमें ये बातें सम्मिलित हैंः
(अ) विधान सभा में पर्याप्त प्रतिनिधियों का अधिकार, एवं
(ब) अपने स्वयं के व्यक्तियों को चुनने का अधिकार,
(1) वयस्क मताधिकार द्वारा, एवं
(2) प्रथम दस वर्षों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र द्वारा एवं तत्पश्चात् आरक्षित सीटों