510 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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मुझे जानकर प्रसन्नता हुई कि औरंगाबाद में एकनाथ अनुसंधान समिति का गठन हुआ है। मुझे युवावस्था में महाराष्ट्र के संन्यासियों की साहित्यिक रचनायें बहुत अच्छी लगती थीं। मैं कह सकता हूँ इस साहित्य को पढ़ने से मनुष्य के नैतिक उत्थान में कितना बड़ा योगदान हो सकता है। मैं समिति की सफलता की कामना करता हूँ और लोक शिक्षा समिति की ओर से हर संभव सहायता का वचन देता हूँ।
औरंगाबाद
2.9.1951
हस्त./-
बी.आर. अम्बेडकर
(एक नाथ दर्शन (मराठी) खण्ड-। श्री एकनाथ, संशोधन मन्दिर, 128 मराठावाड़ा, सुलतान बाजार, हैदराबाद, 1952)