106. हिन्दू महिला का उत्थान एवं पतनः इसके लिए जिम्मेवार कौन था? - Page 528

509

धर्म-विरोधी धर्म को अपना ले, का अन्तिम संस्कार या अंत्येष्टि न की जाए। मनु ने परिवार के उस सदस्य पुरुष या महिला का अंतिम संस्कार या अत्येष्टि करने की निषेधाज्ञा जारी की थी जिसने बौद्ध धर्म को अपना लिया था। दूसरे शब्दों में वह चाहते थे कि ऐसे लोगों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाए जैसे वह असम्बद्ध हो और परिवार के सदस्य न हों। मनु बौद्ध धर्म का सबसे बड़ा विरोधी था। महिलाओं पर थोपी गई निषेधाज्ञाओं का रहस्य है। चूँकि वे जानते थे कि यदि घर को बौद्ध धर्म के हस्तक्षेप से बचाना है तो महिला को नियंत्रण में रखना आवश्यक है और उसने ऐसा ही किया। भारत में महिलाओं के स्तर में गिरावट एवं पतन का जिम्मेदार मनु को ठहराया जाना चाहिए न कि बुद्ध को।

कुछ ही पृष्ठों में मैंने हिन्दू महिला के उत्थान एवं पतन की कहानी प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। मैंने यहाँ यह स्पष्टीकरण भी देने का प्रयास किया है कि उनके पतन का प्रवर्तक कौन है और उसने ऐसा क्यों किया है। मुझे आशा है कि आप पक्षपातशून्य एवं निष्पक्ष रूप से अनुभव करेंगे कि बुद्ध को इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। यदि बुद्ध ने महिला को उन्नत बनाने के लिए कोई प्रयास किया है तो यह प्रयास उसको उन्नत कर पुरुष के समक्ष लाना है।