110. रिपब्लिकन पार्टी का अर्थ - Page 553

534 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

स्वतन्त्रता प्राप्त करने के लिए एक आन्दोलन के रूप में कार्य किया। इसके पास प्रारम्भ में कोई निश्चित लक्ष्य नहीं था। यह अच्छी सरकार की माँग के साथ प्रारम्भ हुआ था। कुछ समय के पश्चात् इसने अपने लक्ष्य को बदल लिया। इसे स्व-शासन के रूप में परिभाषित किया गया। ब्रिटिश राजनीतिक विचारकों ने इस स्व-शासन को दो भागों (1) औपनिवेशिक राज्य और (2) स्वतन्त्रता में विभाजित कर दिया। औपनिवेशिक राज्य का अर्थ साझे सम्राट के प्रति निष्ठा के साथ स्वतन्त्रता। स्वतन्त्रता का अर्थ राजा के प्रति निष्ठा के बिना स्वतन्त्रता।

कुछ समय के लिए भारतीय कांग्रेस औपनिवेशिक राज्य के लिए सहमत हो गई। परन्तु थोड़े समय बाद ही भारतीय कांग्रेस ने अत्यन्त नाटकीय ढंग से स्वतन्त्रता के पक्ष में एक प्रस्ताव 1930 में पारित किया और इसे 1947 में प्राप्त कर लिया।

इस समय तक कांग्रेस एक सेना की भाँति थी, इस सैन्य बल का गठन संसदीय प्रजातन्त्र के उद्देश्य के लिए नहीं बल्कि विदेशी सरकार के विरुद्ध राजनीतिक संघर्ष करने के उद्देश्य से किया गया था। इसे देखकर श्री गाँधी ने बहुत ही बुद्धि मत्ता से सुझाव दिया कि कांग्रेस का विघटन कर दिया जाए और पार्टी सिद्धान्तों पर राजनीतिक पार्टी का गठन सरकार के संचालन के लिए किया जाए। परन्तु नेता लोग सरकार की लगाम अपने हाथों में थामने के लिए बिल्कुल तैयार बैठे थे। उन्होंने श्री गाँधी के परामर्श को सुनने से इंकार कर दिया। सामान्यतया शान्ति के बाद सैन्य बल जिसने अपना मार्ग प्रशस्त करने के लिए संघर्ष किया था, का विघटन कर दिया गया। केवल इस कारण से कि युद्ध के दौरान भर्ती के मानक कम कर दिये गये थे और प्रत्येक अच्छे, बुरे अनासक्त को भी भर्ती की स्वीकृति दी गई थी। भारत के मामले में न केवल सैन्य बल का विघटन कर दिया गया बल्कि सरकार पर अधिकार जमाने की भी स्वीकृति प्रदान कर दी गई।

हमें कांग्रेस सरकार का दस वर्षों का अनुभव है। कोई भी कह सकता है कि यह बहुत विश्वसनीय नहीं है। समय आ गया जब श्री गाँधी के परामर्श को गंभीरता से स्वीकार किया गया और हमने एक और पार्टी के गठन के लिए कदम बढ़ाया और यह पार्टी विपक्षी पार्टी के रूप में कार्य करेगी।

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यह अध्याय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर द्वारा पुणे में दिनांक 22 दिसम्बर, 1952 को ‘प्रजातन्त्र की सफलतापूर्वक कार्यशीलता के लिए दृष्टान्त स्थितियाँ’ शीर्षक पर दिये गये भाषण के पाठ पर आधारित है। -संपादक