112. राजनीति में प्रवेश के लिए प्रशिक्षण विद्यालय - Page 560

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अच्छी बात है। परन्तु मैं किसी की भावना की दुहाई नहीं दूँगा कि सदस्य जो इस सदन में अपने विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, शिक्षित होने चाहिए। परन्तु मैं इस समय यह नहीं कह सकता कि आप इसे कानूनी रूप कैसे दे सकते हैं। अतः मेरा सुझाव यह है कि यह बेहतर होगा कि यह मामला लोगों या सरकार चलाने वाली राजनीतिक पार्टियों, पर छोड़ देना चाहिए। मुझे इस संबंध में कोई संदेह नहीं है कि यदि राजनीतिक पार्टियाँ, अपने स्वयं के विशिष्ट उद्देश्यों के लिए इस मामले में ध्यान नहीं देती तो कुछ समय बाद लोग अपने आप इससे निपट लेंगे। लोग उन व्यक्तियों, जो इस सदन में अपने दायित्वों का उचित रूप से निर्वाह नहीं करेंगे को बने रहने तथा वापिस आने की स्वीकृति नहीं देंगे। वे परिणाम चाहते हैं। इस संबंध में मैं आश्वस्त हूँ कि वे अनुभव करेंगे कि केवल कर्त्तव्य के माध्यम से ही वह इस उद्देश्य को प्राप्त कर सकते हैं कि इस सदन में अच्छे व्यक्तियों को भेजा जाये। मेरे विचार से यह उपयुक्त रहेगा कि मामला लोगों पर छोड़ दिया जाना चाहिए’’।

डॉ. अम्बेडकर इस बात से भली-भाँति विदित थे कि यद्यपि चुने हुए प्रत्याशियों में ज्ञान और शील हो सकते हैं परन्तु तब भी उनसे संसदीय विधायी पद्धतियों में अवश्य प्रशिक्षित होना चाहिए। उसके मस्तिष्क में घूमते हुए इस विचार से उसने ‘राजनीति में प्रवेश के लिए प्रशिक्षण विद्यालय’ स्थापित करना प्रस्तावित किया।

भारत में प्रजातंत्रीय शक्तियों को बल देने एवं प्रस्तावित रिपब्लिकन पार्टी में युवा वर्ग को लाने के लिए डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने वर्ष 1956 में राजनीति में प्रवेश के लिए प्रशिक्षण विद्यालय स्थापित किया। डॉ. अम्बेडकर निदेशक थे और श्री एस.रेगी रजिस्ट्रार थे। ये विद्यालय उनके लिए था जिन्होंने विधान मण्डल में जाने की आकांक्षा संजोयी हुई थी और यह देश में अपनी किस्म का पहला विद्यालय था। उन्होंने आग्रह किया कि नवागन्तुक को भाषण कला अवश्य विकसित करनी चाहिए ताकि विभिन्न विषयों जैसे अर्थशास्त्र, राजनीति, सामाजिक एवं संसदीय पद्वति पर अपने विचार व्यक्त कर सके। वह एक ऐसे प्रधानाचार्य की तलाश में थे जिसका व्यक्तित्व अच्छा हो, विषय में पारंगत हो तथा आकर्षक व्यक्तित्व पर भाषण दे सके। वह मानते थे कि विद्यालय की प्रतिष्ठा अधिकतर अध्यापक की समर्थता और वाक् क्षमता पर निर्भर करती है। विद्यालय 15 विद्यार्थियों के साथ प्रारंभ हुआ और एक जुलाई 1956 से मार्च, 1957 तक चला

डॉ. अम्बेडकर ने दिसम्बर, 1956 में इस विद्यालय के विद्यार्थियों को भाषणकला पर व्याख्यान देने की योजना बनाई थी। परन्तु असामयिक मृत्यु के कारण वह विद्यालय में नहीं आ सके।

---समाप्त--- 4.6.16