112. राजनीति में प्रवेश के लिए प्रशिक्षण विद्यालय - Page 559

540 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

शिक्षा के प्रश्न पर विचार करने पर मैं यह समझाने की इच्छुक नहीं हूँ कि मैं अज्ञानता को सदाचार मानता हूँ। यह बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए। मैं शिक्षा को समझता का दर्जा प्राप्त करने के लिए आवश्यक अर्हता मानता हूँ जो कि अपने दायित्वों का निर्वाह करने के लिए बहुत ही आवश्यक है। इस सदन में ऐसे लोग हैं यद्यपि वे शिक्षित नहीं हैं परन्तु जिस वर्ग का वह प्रतिनिधित्व करते हैं उनकी समस्याओं के समाधान के लिए उपायों का सुझाव देना भी आवश्यक है। भाषण देना तथा समस्याओं का खुले आम प्रचार करना एक आसान बात है परन्तु उपाय खोजना बहुत कठिन कार्य है। इसके लिए शिक्षा की आवश्यकता है और इसलिए पिछ़डी जातियों, अनुसूचित जातियों या कबीला क्षेत्रों की स्थिति में भी शिक्षा एक अत्यंत आवश्यक अवयव है। मैं इसे कैसे सुनिश्चित कर सकता हूँ? जब मैं इस सुझाव की जाँच कर रहा था कि यहाँ शैक्षणिक अर्हता के रूप में कुछ होना चाहिए, मैंने पाया है कि एक उक्ति जो सैद्धान्तिक या अकादमिक पहलू से बहुत अच्छी लगती है परन्तु इसके अन्य अनिष्टों की जानकारी के बिना उसे यथार्थ रूप नहीं दिया जा सकता। यह मेरी मुश्किल है। आप मानक या स्तर कहाँ पर नियम करेंगे? क्या आप कहेंगे कि इस सदन के सदस्यों की अर्हता केवल बी.ए. होनी चाहिए? मान लिया आप ऐसा कर देते हैं तो इसका परिणाम क्या होगा? सदस्य शायद जानते होंगे कि यहाँ अनेक लोग है जो शैक्षणिक और बुद्धिमता की दृष्टि से स्नातक से कहीं अधिक सक्षम हैं यद्यपि वे किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में नहीं गये। इनमें से कई ऐसे सदस्य होंगे जिन्होंने निजी रूप से अपने आपको शिक्षित बनाया है, जो कि बी.ए. या एम.ए. के समान सक्षम या बेहतर हैं क्या आप ऐसे लोगों को केवल इसलिए रोकने जा रहे हैं कि वे एक विश्वविद्यालय से प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में समर्थ नहीं हो सके हैं। मेरे विचार से यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम होगा।

एक अन्य परिणाम पर विचार करें। इस देश में शिक्षा निम्नतम श्रेणी की है। इतना ही नहीं परन्तु कुछ कारण जिनकों हम सभी जानते हैं इस देश में शिक्षा सभी समुदायों में सार्वभौमिक रूप से नहीं फैली हुई है। यहाँ एसे समुदाय हैं जो उच्च शिक्षित हैं और यहाँ ऐसे समुदाय हैं जहाँ शिक्षा बहुत कम है। मान लिया आप बी.ए. या मैट्रिकुलेशन की शिक्षा को मानक बनाते हैं तो आपको इससे ऐसा नहीं लगता कि आप इस सदन की सदस्यता को कुछ लोगों का विशेषाधिकार बना रहे हैं। मुझे भय है यही परिणाम होगा। माना कि आप अपना स्तर कम कर देते हैं उदाहरण के लिए चतुर्थ स्तर या केवल साक्षरता तक कर देते हैं ताकि किसी समुदाय को इस सदन में अपना सदस्य भेजने के अवसर से वंचित न किया जाये। क्या इस अर्हता से कुछ भला होगा? यह किसी मूल्य का नहीं होगा। अतः मेरा आग्रह यह है कि यह एक