31. भारत और ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल - Page 98

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. संबंध की जरूरत

भारत और ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल के बीच संबंध स्थापित करने के प्रश्न पर विचार करते समय दो प्रश्न निर्णयार्थ उपस्थित होते हैं। पहला प्रश्न यह है कि क्या भारत को ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल से अपने सभी संबंध तोड़ लेने चाहिए और एक स्वतंत्र संप्रभु राज्य का दर्जा हासिल कर लेना चाहिए ? दूसरा प्रश्न यह है कि यदि भारत ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल से अपने सभी संबंध विच्छेद नहीं करता तो भारत और ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल के बीच क्या संबंध होना चाहिए ?

  1. पहले प्रश्न पर शायद ही कोई मतभेद दिखाई देता है। कुछेक अतिवादियों को छोड़कर अधिकांश ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल से भारत के संबंध विच्छेद के विरुद्ध हैं। ऐसा नहीं है कि केवल भारत ही है जो इस संबंध को बनाए रखना चाहता है, ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल की भी यही आकांक्षा है। यह राष्ट्रमण्डल के हित में ही होगा कि भारत उससे संबंध समाप्त न करे। भारत और राष्ट्रमण्डल के बीच संबंध राष्ट्रमण्डल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। राष्ट्रमण्डल की रक्षा भारत से इसके संबंध पर निर्भर है। वहीं उदासीनता का बर्ताव करना भारत के लिए ठीक नहीं होगा। क्योंकि भारत भी राष्ट्रमण्डल से संबंध रखे बिना कुछ नहीं कर सकता। दो बातें हैं जो भारत के लिए जरूरी हैं, जो बाहरी दबाव के बिना मनचाहे तरीके से अपना भविष्य संवारने की क्षमता रखने वाले एक स्वतंत्र देश के रूप में अपना अस्तित्व बनाए रखने और विश्व के मामलों में अपना दखल रखने की दृष्टि से बहुत जरूरी हैं। स्वतंत्र भारत जब तक इस स्थिति में नहीं पहुंचता, वह स्वतंत्र भारत नहीं रहेगा। भारत इस स्थिति में तब तक नहीं पहुंच सकता जब तक उसका औद्योगीकरण पूर्ण न हो जाए और वह रक्षा तथा आक्रमण के लिए पर्याप्त सामरिक शक्ति का विकास न कर ले। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए भारत को तकनीकी उपस्कर प्राप्त करने चाहिए जो अभी हमारे पास नहीं हैं और जिन्हें विदेशी मदद के बिना हम प्राप्त नहीं कर सकते। यह विदेशी सहायता किसी और क्षेत्र से प्राप्त करने के बजाए ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल से ज्यादा आसानी से प्राप्त की जा सकती है। अतः यह भारत के हित में होगा कि