31. भारत और ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल - Page 99

80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वह ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल के साथ संबंध बनाए रखे।

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  1. दूसरे प्रश्न का हल इतना आसान नहीं है। इसमें अनेक समस्याएं हैं। भारत ने एक राष्ट्र का दर्जा हासिल कर लिया है। क्या इसके बदले उसे एक स्वतंत्र उपनिवेश का दर्जा ले लेना चाहिए? यह पहली समस्या है, जिसका समाधान हमें करना है। अत्यंत औपचारिक दृष्टिकोण से ऐसा करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। राष्ट्र के दर्जे और उपनिवेश के दर्जे में कोई अन्तर नहीं है। उपनिवेश का दर्जा कोई अधीनस्थ दर्जा भी नहीं है। प्रत्येक स्वतंत्र उपनिवेश न केवल स्वायत्तशासी है बल्कि स्वतंत्र भी होता है और उसका दर्जा किसी भी अन्य स्वतंत्र उपनिवेश के बराबर का होता है। राष्ट्रमण्डल पद्धति में यूनाइटेड किंगडम स्वतंत्र उपनिवेशों में से एक है। प्रत्येक स्वतंत्र उपनिवेश कितना स्वायत्त और स्वतंत्र है इसे हाल ही में हुई दो घटनाओं से देखा जा सकता है। एक घटना दक्षिण अफ्रीका से संबंधित है। सम्राट एडवर्ड अष्टम शेष राष्ट्रमण्डल के सम्राट न रहते हुए भी दो दिनों के लिए दक्षिण अफ्रीका के सम्राट रहे। दूसरी घटना आयरलैण्ड से संबंधित है। पिछले युद्ध में जब सभी स्वतंत्र उपनिवेश युद्धरत थे, आयरलैण्ड ने तटस्थ रहने का निर्णय लिया था। प्रत्येक स्वतंत्र उपनिवेश की स्वायत्तता और स्वतंत्रता कितनी वास्तविक और कितनी कारगर है, यह दिखाने के लिए मेरी राय में इससे बड़ा और कोई प्रमाण आवश्यक नहीं है। यह राष्ट्र के दर्जे के समान ही है।

  2. प्रश्न यह है कि क्या भारत, राष्ट्र का दर्जा हासिल कर लेने के बाद अब स्वतंत्र उपनिवेश का दर्जा स्वीकार कर सकता है? मेरे विचार में तो यह ऐसा नहीं कर सकता। इसके कारण भी जाहिर है। ये संवैधानिक और मनोवैज्ञानिक दोनों है। स्वतंत्र उपनिवेश के दर्जे की तीन अनिवार्यताएं हैं - (1) सम्राट के प्रति वफादारी को मान्यता, (2) सम्राट को उसके द्वारा नियुक्त गवर्नर जनरल के माध्यम से कार्य करने वाले स्वतंत्र उपनिवेश के प्रमुख के रूप में मान्यता देना, (3) स्वतंत्र उपनिवेश की संसद के सदस्यों द्वारा सम्राट के प्रति सत्यनिष्ठा की शपथ। यदि हम प्रत्येक स्वतंत्र उपनिवेश के संविधान का अध्ययन करें तो यह पता चलेगा कि इसमें तीनों बातें शामिल होती हैं।

  3. स्वतंत्र भारत के संविधान के प्रारूप में जिस पर संविधान सभा द्वारा विचार किया जा रहा है, इन बातों को मान्यता नहीं दी गई है। प्रारूप संविधान की उद्देशिका में भारत को एक प्रभुसत्ता सम्पन्न स्वतंत्र गणराज्य बताया गया है। राज्य का प्रमुख सम्राट होने पर “गणराज्य” शब्द का प्रयोग सुसंगत नहीं है। संविधान के प्रारूप में