28. 17.5.1936 तुम्हारी मुक्ति व उन्नति के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक। - Page 123

102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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मुक्ति और उन्नति के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक है

रविवार 17 मई, 1936 को पूर्व और दक्षिण ठाणे जिले के अछूतों ने कल्याण में एक महाअधिवेशन का आयोजन किया। यह अधिवेशन डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की अध्यक्षता में धर्म परिवर्तन घोषणा को खुले समर्थन के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। आस-पास के 100 से 150 गांवों के अछूतों की भीड़ रेलवे स्टेशन पर डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के स्वागत में उमड़ पड़ी। 3 बजे अपराह्न कल्याण रेलवे स्टेशन पहुंचने पर अनेक नेता उनसे मिले और अभिनन्दन किया।

रेलवे स्टेशन के बाहर लोग नारे लगा रहे थे ‘‘अम्बेडकर जिन्दाबाद, थोड़े दिन में भीमराज’’। बाहर जुलूस में लगभग 4000 अछूत थे। इस जलूस में बैंड पार्टी, शारिरिक व्यायाम तथा कलाबाजी और करतब करने वाले लोगों की मंडलियां भी थीं। पूरा वातावरण गूंगे और बहरे कहे जाने वाले अछूतों के प्यार तथा आत्मसम्मान की मनोदशा से ओत प्रोत था।

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने विस्तार से समझाया कि अछूतों के पास धर्म परिवर्तन को छोड़ कोई दूसरा विकल्प क्यों नहीं है। - सम्पादक

’’धर्म परिवर्तन के बारे में मेरे विचार जानने को आप यहाँ सम्मिलित हुए हैं। इसलिए मैं आप लोगों से इस विषय पर विस्तार से चर्चा करना आवश्यक समझता हूं।

कुछ लोग यह प्रश्न उठाते हैं, ‘‘हम अपना धर्म परिवर्तन क्यों करें?’’ तब मेरी सहज प्रतिक्रिया उलट प्रश्न करने की होती है, ‘‘हम धर्म परिवर्तन क्यों न करें?’’

मैं अपने जीवन में घटे कुछ दृष्टातों का वर्णन करूंगा तब आपको मेरे धर्म परिवर्तन के विकल्प को समझना आसान होगा। आपको भी अपने जीवन में ऐसे कटु अनुभव हुए होंगे।

मेरे जीवन में घटित चार या पांच घटनाओं ने मेरे मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ी और मुझे हिन्दू धर्म त्यागकर कोई और धर्म अपनाने को प्रेरित किया। आज उनमें से दो या तीन घटनाऐं आपको बताऊंगा।

मेरा जन्म महू, इन्दौर में हुआ, जहां मेरे पिता जी सेना में सेवारत थे। वे उस समय सूबेदार थे। क्योंकि हम छावनी में रहते थे, सेना क्षेत्र से बाहर की