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नहीं बनी। गांधी ने गलत निष्कर्ष निकाला कि भारत और लन्दन की कुछ अदृश्य शक्तियों ने डॉ. अम्बेडकर को प्रोत्साहन प्रदान कर डॉ. अम्बेडकर की धमकियों के चलते समस्या को खूब बढ़ा दिया है। ख्3,
सेगांव से वापस जाते हुए वार्धा स्टेशन पर दलितों ने बड़े उत्साह से डॉ. अम्बेडकर का स्वागत किया।
गांधी के लाखों सर्मथकों धन पति, वालचन्द हीराचन्द और जमनालाल बजाज ने डॉ. बी.आर. अम्बेडकर से पूछा कि वे गांधी के शिविर में सम्मलित क्यों नहीं हो जाते क्योंकि अगर वे ऐसा करें तो उनको दलित वर्ग के उत्थान के लिए असीम सम्पदा और संसाधन उपलब्धि होने की संभावना होगी। डॉ. अम्बेडकर ने स्पष्ट उत्तर दिया कि गांधी और उनमें सर्वोच्च विषयों पर विभिन्न मत हैं। यह सुनकर उन्होंने नेहरू का उल्लेख किया और कहा कि वे अपने विचारों को एक किनारे छोड़कर नेहरू और गांधी के मार्ग पर चलें। इस पर उन्होंने यह कहकर कि नेहरू का उदाहरण उन पर लागू नहीं होता चुप करा दिया और यह जुमला जड़ा कि वे अपनी सफलता के लिए दोनों लक्ष्मी पुत्र अपनी आत्मा का बलिदान नहीं कर सकते।
डॉ. अम्बेडकर के स्वागत में उमड़ी दलितों की भारी भीड़ को देख लाखों लोग आश्चर्य चकित रह गये और उन्होंने कहा यद्यपि वे इतना धन हरिजनों के कल्याण पर खर्च करते हैं परन्तु इतनी उत्साही प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिलती। डॉ. अम्बेडकर कहां चुप रहने वाले थे और उत्तर थमाया कि यह अन्तर तो एक माँ और एक आया के बीच का है। ख्4,
4 कीर, पृष्ठ सं. 268-269