29. 31.5.1936 मुक्ति का मार्ग क्या है? - Page 153

132 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जितना कि स्वराज्य भारत के लिए। धर्म परिवर्तन और स्वराज्य का अन्तिम उद्देश्य एक ही है। इन दोनों के अन्तिम लक्ष्य में तनिक भी अन्तर नहीं है। यह अन्तिम उद्देश्य स्वतंत्रता प्राप्त करने का है। यदि मानवता के जीवन के लिए स्वतंत्रता आवश्यक है तो अछूतों के लिए धर्म परिवर्तन, जो उनको पूर्ण मुक्ति दिलाएगा, किसी भी काल्पनिक विस्तार से धर्म परिवर्तन को निरर्थक नहीं ठहराया जा सकता।

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मैं यह चर्चा करना आवश्यक समझता हूं कि पहले आर्थिक प्रगति की जाए या धर्म परिवर्तन? आर्थिक प्रगति को प्राथमिकता देने के पक्ष से मैं सहमत नहीं हूं। धर्म परिवर्तन या आर्थिक प्रगति में से किस को प्राथमिकता दी जाए, यह वैसा ही नीरस विषय है, जैसा कि राजनैतिक सुधार या सामाजिक सुधार में से प्राथमिकता के लिए एक का चयन करना। समाज के विकास और उन्नति के लिए कई उपाय प्रायोगिक होते हैं और प्रत्येक का अपना महत्व होता है। इन उपायों का प्रयोग करने के लिए कोई निश्चित क्रम नहीं बनाया जा सकता। यदि कोई धर्म परिवर्तन और आर्थिक सुधार में से प्राथमिकता जानने का आग्रह करे, तो मैं धर्म परिवर्तन की उपयुक्तता को ज्यादा महत्व दूंगा। मैं यह समझने में असमर्थ हूं कि जब तक आप पर अछूत होने का कलंक हैं तब तक आप आर्थिक प्रगति कैसे कर सकते हैं? अगर आप एक दुकान खोलें और लोगों को मालूम हो कि दुकानदार एक अछूत हैं तो कोई भी आपसे कुछ नहीं खरीदेगा। अगर आप सेवा के लिए अछूत प्रार्थी हैं तो आपके अछूत होने का पता होने से आपको सेवा में नहीं लिया जाएगा। अगर आपमं से कोई ज़मीन खरीदना चाहे और बेचने वाले को आपके अछूत होने का ज्ञान हो जाए तो कोई आपको जमीन नहीं बेचेगा। आप आर्थिक प्रगति के लिए कोई भी तरीके अपनाओ परन्तु आपकी अस्पृश्यता के चलते आपके सभी प्रयत्न नकारात्मक हो जाऐंगे। अस्पृश्यता आपकी प्रगति के रास्ते में स्थायी रूकावट है। और जब तक आप इस रूकावट को धर्म परिवर्तन द्वारा न हटा दें; आपका मार्ग विपदा मुक्त नहीं होगा। आप में से कुछ के बच्चे किसी भी उपयुक्त स्त्रोत से पैसा लेकर शिक्षा पाने का प्रयास कर रहें हैं। इस प्रलोभनवश अछूत बने रहने और प्रगति करने का झुकाव बना लेते हैं। मैं उन नवयुवकों से यह प्रश्न पूछना चाहूंगा कि आपकी शिक्षा पूर्ति के बाद, यदि आपको उपयुक्त पद न मिले तो आप अपनी शिक्षा का क्या करेंगे? क्या कारण है कि हमारे अधिकतम शिक्षित लोग आज भी बेरोजगार हैं? मेरे विचार से अस्पृश्यता ही इस बेरोजगारी का मुख्य कारण हैं। अस्पृश्यता के कारण आपके गुणों का उचित आंकलन नहीं किया जाता। आपकी मानसिक क्षमता के सम्मान को भी अस्पृश्यता के कारण गुंजाइश नहीं है। आपकी अस्पृश्यता के कारण आपको सेना सेवा से बाहर कर दिया जाता है। आपको पुलिस विभाग में भी अस्पृश्यता के कारण नौकरी नहीं दी