- 21.7.1942 मैं आपके साथ रहूंगा। 280
- 22.7.1942 मैं देश की आजादी की अपनी इच्छा के लिए किसी 281
के आगे नहीं झुकता।
- 23.8.1942 मैं चाहता हूं, शासन की लगाम आपके हाथ में हो। 283
- 3.11.1942 वर्तमान अव्यवस्था से केवल भारतीयों का अहित। 285
- 12.1.1943 गैर-ब्राह्मण पार्टी को फिर से संगठित होना चाहिए। 287
- 17.1.1943 थलसेना, नौसेना और वायुसेना में भर्ती हों। 288
- 2.5.1943 गांधी और जिन्ना को अवकाश ग्रहण कर लेना चाहिए। 289
- 10.5.1943 युद्धोत्तर काल में गरीबी सहन नहीं की जाएगी। 292
- 10.5.1943 श्रमिकों के हाथों में स्वराज आ सकता है। 293
- 5.12.1943 अधिकारों का उपयोग करने योग्य बनो। 294
- 31.1.1944 अनुसूचित जातियों को हिंदुत्व त्याग देना चाहिए। 295
- 26.8.1944 अनुसूचित जातियों के समक्ष प्रश्न है- ‘अभी या कभी नहीं’। 297
- 20.9.1944 दलित वर्ग हिंदू समाज का अंग नहीं है। 299
- 20.9.1944 मैं राष्ट्रवाद का विरोधी नहीं हूं, किंतु .... 303
- 23.9.1944 एकता का महत्त्व सर्वोपरि है। 308
- 24.9.1944 मैं भारत के देश भक्तों से बहुत आगे था। 310
- 24.9.1944 भारत का इतिहास बौद्ध धर्म और ब्राह्मण धर्म के संघर्ष 321
के अलावा अन्य कुछ नहीं है।
- 24.9.1944 गांधी प्रांतीय स्वायत्तता से संतुष्ट थे। 324
- 28.9.1944 हम इस देश के भाग्य-विधाता हैं। 325
- 2.1.1945 विद्यार्थी यह देखें कि उपाधि से सकारात्मक ज्ञान भी मिले। 327
- 3.1.1945 देश के लाखों गरीबों के लिए संपन्नता की व्यवस्था की नींव रखिए। 329
- 3.1.1945 आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में समाचार-पत्र सुशासन का 330
मूल आधार है।
- 7.4.1945 अनुसूचित जातियों को संगठित होना चाहिए। (पीपुल्स हेराल्ड) 334
- 6.5.1945 आदिवासी जनजातियों के लिए एक कानूनी आयोग होना चाहिए। 335
- 20.5.1945 भारत की स्वंतत्रता का लक्ष्य निर्विवाद है। 340
- 3.10.1945 मनुष्य को राजनीतिक दृष्टि से जागरूक बनाने के लिए 342
सुविचारित प्रयत्न कीजिए।
- 30.11.1945 अगस्त 1942 में सरकार की कार्रवाई न्यायोचित थी। 344
- 16.1.1946 गांधी जी का इनकार। 345
- 17.2.1946 अनुसूचित जातियों की मांगे एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय 346
न्यायाधिकरण के पास भेजी जाएं।