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मैं अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण अर्पित कर
दूंगा
‘‘फरवरी, 1942 के मध्य में वागले हाल बंबई में स्प्रिंग व्याख्यान शृंखला पर
चर्चा हुई थी। थाट्स आन पाकिस्तान पर चर्चा के लिए तीन दिन आरक्षित बसंत थे।
चर्चा के समय डॉ. अम्बेडकर मौजूद थे। बैठक की अध्यक्षता आचार्य एम. वी. डॉेंडे
ने की। डोंडे के सुस्पष्ट अनुरोध पर उनके मित्र, सहकर्मी तथा प्रांत में एक विख्यात
शिक्षाविद् डॉ. अम्बेडकर चर्चा का उत्तर देने के लिए खड़े हुए।’’
उन्होंने कहा वे अपने शब्दों का उन लोगों के लिए अपव्यय नहीं करेंगे जो
यह मानते हैं कि पाकिस्तान एक विवादयोग्य विषय ही नहीं है। यदि ऐसा सोचा
जाता है कि इस तरह की मांग अनुचित है तो उनके लिए पाकिस्तान का आगमन
एक भयंकर स्थिति बन जाती। उन्होंने कहा कि लोगों को इतिहास भूलने के लिए
कहना गलत है। इसी क्रम में उन्होंने यह कहा, ‘‘वे इतिहास की रचना नहीं कर
सकते, इतिहास को कौन भूले। भारतीय सेना में मुसलमानों की प्रबलता कम करने
और सेना को सुरक्षित रखने के लिए विरोधी तत्वों से मुक्ति पाना बुद्धिमानी है। हम
अपनी भूमि की रक्षा करेंगे। इस गलत धारणा में न रहें कि पाकिस्तान अपने मुस्लिम
शासन को सारे भारतवर्ष में फैला सकेगा। हिंदू उसे धूल चटा देंगे। मैं यह स्वीकार
करता हूं कि सवर्ण हिंदुओं के साथ कुछ मुद्दों पर मेरा झगड़ा है लेकिन मैं आपके
समक्ष यह वायदा करता हूं कि मैं अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण अर्पित
कर दूंगा।’’ इस पर जोरदार तालियों से उनके कथन की सराहना की गई। ख्1,
1 कीर, पृष्ठ 340-341