70. 26.4.1942 आपका उद्धार स्वयं आपके हाथों होना चाहिए। - Page 245

224 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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पुस्तकों से भरी हुई दीर्घा, जिसमें डॉ. बी. आर. अम्बेडकर पूरे रविवार अर्थात 26 अप्रैल, 1942 को व्यस्त रहे थे और अपने नए धमाके के लिए सामग्री इकट्ठा कर रहे थे, इस विषय पर धमाकेदार सामग्री के साथ उस दीर्घा से निकलते ही उन्होंने कहा कि ‘‘हिंदुओं ने हमारे साथ क्या किया है’’? और इसके साथ ही वे बमों अथवा सहयोग पर चर्चा करने के लिए शाम के समय कामगार मैदान बंबई चले गए।

यह मौका उनकी स्वर्ण जयंती समारोह का था, जिसमें एक थैली भेंट करने के लिए बहुत भारी भीड़ इकट्ठी हुई थी मानो कोई मेला आयोजित किया गया हो। लेकिन यह भीड़ 10000 कंठों से गूंजते हुए जयघोष करती वापस गई।

पहले उन्होंने घोषणा की कि ‘‘मैं अपने जन्म दिन पर अब और कोई समारोह नहीं चाहता’’।

बाद में डॉ. अम्बेडकर की सुखद शांत आवाज एक गूंज में बदल गई जब उन्होंने दहाड़ते हुए कहा’’ अंग्रेज सरकार ने हमें अत्यंत अविश्वसनीय तरीके से अपमानित किया है। क्रिप्स के प्रस्ताव अंग्रेजों के कठिन दौर में कांग्रेस और लीग को रिझाने और दलित वर्गों की बलि लेने के लिए थे। कांग्रेस और लीग की मांगें पारस्परिक दृष्टि से तथा बलपूर्वक विरोधी थीं और अंग्रेजों ने दोनों की मांगें स्वीकार करके दोनों द्वारा पूर्ण अस्वीकृति सुनिश्चित कर ली थी। इसके लिए ईश्वर को धन्यवाद दिया जाना चाहिए।

‘‘इससे दलित वर्गों को एक विनाश से बचा लिया गया है। लेकिन यह बुराई अपना सिर फिर खड़ा कर सकती है। यदि अगली बार ऐसा होता है तो आपको कार्रवाई करने के लिए तैयार रहना होगा। मैं यह नहीं बता सकता कि यह कार्रवाई संवैधानिक अथवा असंवैधानिक, हिंसात्मक अथवा अहिंसात्मक, शांतिपूर्ण अथवा क्षुब्धकारी--किस प्रकार की होगी।

कांग्रेस के लिए पेशकश

इसके बाद संवैधानिक परिपाटी के अनुयायी ने ऐसा संकेत दिया कि उनकी अगली जयंती शायद क्रांतिकारी रूप में मनाई जाएगी।