74. 18/19.7.1942 यदि लोकतंत्र समाप्त होता है, तो यह हमारा विनाश होगा। - Page 269

248 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पर बल देना चाहिए, वह भी लोक लागत पर केन्द्रीय सरकार द्वारा किया जाए। ऐसी बहुत सी कष्षियोग्य भूमि है जो सरकार की संपत्ति है और उस पर किसी का अधिकार नहीं है। अछूतों के नए गांव की स्कीम को अमलीजामा पहनाने के प्रयोजन से इसको आरक्षित किया जा सकता है। सरकार निजी स्वामियों से बाहर की खाली भूमि खरीद सकती है और इसे इस प्रयोजन के लिए उपयोग में ला सकती है। हरिजनों को उनकी वर्तमान बस्तियों से हटाकर इन नए गांव में ले जाने और वहां पर उन्हें स्वतंत्र किसानों के रूप में बसाने का कार्य कठिन नहीं होगा। इस कार्य में समय लग सकता है। लेकिन इससे कोई अन्तर नहीं पड़ता। यह इतना महत्वपूर्ण है कि हमें संविधान के माध्यम से इस स्कीम को बनाने पर जोर देना चाहिए और इसे केन्द्रीय सरकार का एक दायित्व बना दिया जाना चाहिए।

एक अन्य भी मुद्दा है जिसके विषय में मुझे आपसे कुछ बातें कहनी हैं। भारत के अछूतों के प्रवक्ता के रूप में कार्य करने के वास्ते एक केन्द्रीय अखिल भारतीय राजनीतिक संगठन बनाए जाने की आवश्यकता है। हम अपने राजनीतिक क्रियाकलापों को अपने प्रांतीय संगठनों के माध्यम से चला रहे हैं। मैंने पाया कि प्रातों में भी राजनीतिक संगठनों की भरमार है। कोई भी महत्वाकांक्षी व्यक्ति जो अपने आपको अध्यक्ष अथवा सचिव के रूप में देखना चाहता है, वह एक संगठन बना लेता है जिसमें वह स्वयं अध्यक्ष अथवा सचिव बन जाता है। उसे एक पत्र छपवाने से अधिक कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं होती है जिस पर कि संगठन का नाम होता है और उसका नाम अध्यक्ष अथवा सचिव के रूप में होता है। यह अव्यवस्था की स्थिति है, जिस पर आपको तत्काल रोक लगानी होगी। ऐसा करने का केवल एक रास्ता है। और वह एक अखिल भारतीय संगठन स्थापित करना है जिसकी प्रांतीय शाखाएं हों और सभी मौजूदा संगठनों को समाप्त कर दिया जाए। यह आपको आवश्यक शक्ति प्रदान करेगा और आपको इस ढंग से कार्य करने में सक्षम करेगा जो आपको एक संयुक्त मोर्चा बनाने में सहायता करे। मैं आशा करता हूं कि आप इस मामले में तत्काल सही कदम उठाएंगे।

मैंने अछूतों की समस्या के संबंध में जो कुछ सोचा और अनुभव किया वह आपको बता दिया है और अब मैं आशा करता हूं कि आप उस पर अच्छी तरह से विचार करेंगे।

संभवतः अंत में मुझे युद्ध के प्रति अपने दष्ष्टिकोण का संदर्भ लेना चाहिए। प्रारंभ से ही हमने युद्ध संबंधी प्रयासों में सहायता की है। मुझे यह विश्वास है कि हम इसे अपना समर्थन देना जारी रखेंगे। हमारी अपनी राजनीतिक मांगें हैं जिन्हें हम पूरा करने पर बल देंगे। लेकिन हमने अपनी मांगों के पूरा हुए बिना ही बिना किसी