79. 22.7.1942 मैं देश की आजादी की अपनी इच्छा के लिए किसी के आगे नहीं झुकता। - Page 302

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मैं देश की आजादी की अपनी इच्छा के लिए किसी के आगे

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नहीं झुकता

22 जुलाई, 1942 की पिछली रात डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने, भट्ट हाई स्कूल सभागार, बम्बई में, आयोजित समता सैनिक दल स्वागत समारोह के अपने भाषण में, कहा था-

‘‘सभी देशभक्त भारतीयों का, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल के हों, यह कर्तव्य है कि वे इस समय अपने देश में नागरिक अवज्ञा आंदोलन चलाने और इस प्रकार अराजकता एवं अव्यवस्था फैलाने के कांग्रेस के प्रयास का अपनी पूरी ताकत और संसाधनों से प्रतिरोध करें, क्योंकि इससे निःसंदेह इस देश की पराधीनता में मदद मिलेगी और उसे बढ़ावा भी मिलेगा।

‘‘हमने पिछले नागरिक अवज्ञा आंदोलन में मात्र इस कारण हस्तक्षेप नहीं किया था, क्योंकि उस समय स्थिति पूरी तरह भिन्न थी।

‘‘आज आक्रामक जापान ठीक भारत की दहलीज पर खड़ा है। मिस्र और रूस की सीमाओं पर भी स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं है।

‘‘मुझे लेशमात्र संदेह नहीं है कि ऐसे मौके पर नागरिक अवज्ञा आंदोलन शुरू करना सीधे दुश्मन के खेल में शिरकत करना होगा। हम कांग्रेस को या किसी भी अन्य को यह खेल नहीं खेलने देंगे। यह भारत के साथ विश्वासघात का खेल है।

‘‘मैं इस देश की आजादी की अपनी इच्छा के लिए किसी के भी आगे नहीं झुकता। लेकिन मैं इस देश पर जापानी शासन लाने में मदद करने के लिए अंग्रेजों को निकालना नहीं चाहता।’’

‘‘हो सकता है, कांग्रेस कार्य समिति का संकल्प सिर्फ झूठ हो। यदि ऐसा है तो इस विषय में कुछ करने की जरूरत नहीं है। किंतु यदि इस धमकी को वास्तव में व्यावहारिक रूप दिया गया, तो समता सैनिक दल का कर्तव्य होगा कि वह कांग्रेस का दिमाग ठीक करने तथा शहर में अराजकता एवं अव्यवस्था को रोकने के लिए अपने संगठन का इस्तेमाल करे।’’