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23 अगस्त, 1942 को दोपहर बाद ‘दलित वर्ग कल्याण संघ’ दिल्ली द्वारा आपके सम्मान में आयोजित समारोह में बोलते हुए, भारत सरकार के श्रम सदस्य डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने भारत के संवैधानिक लक्ष्य के परिप्रेक्ष्य में अपने समाज के भविष्य के बारे में एक महत्वपूर्णं वक्तव्य दिया-
उन्होंने कहा,
‘‘मैं दलित वर्गों को भारत में अन्य समुदायों के साथ बराबरी के स्तर पर रखना चाहता हूं। मैं यह नहीं चाहता कि आप लोग दूसरे समुदायों की सेवा करते रहें बल्कि शासन की लगाम मैं आपके हाथ में सौंपना चाहता हूं। आप लोगों को मुसलमानों के साथ समानता के आधार पर देश की राजनीतिक सत्ता में भागीदार बनना चाहिए।
‘‘शासन की सत्ता और प्राधिकार में भागीदारी और उसका बंटवारा करने के दलित वर्गोंं के अधिकार को ब्रिटिश सरकार ने माना था।
‘‘सन् 1940 से दलित वर्गों की स्थिति में गिरावट आई है। पहले, क्रिप्स प्रस्तावों में अन्य बातों के साथ-साथ, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के साथ समझौते की बात कही गई थी, अतः जब तक यह समझौता नहीं होगा तब तक दलित वर्गों का कोई महत्व नहीं है। ‘‘डॉ. अम्बेडकर ने घोषणा की थी, ‘‘मेरी मान्यता है कि दलित वर्ग के साथ यह बहुत बड़ा धोखा है।’’
उन्होंने आगे कहा कि क्रिप्स मिशन के असफल होने से भारत और विदेशों में जन साधारण केवल कांग्रेस और मुस्लिम लीग के साथ समझौता करने की बात करते हैं। कांग्रेस मुस्लिम लीग के साथ एक समझौते पर पहुंचने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसने दलित वर्गों के साथ समझौता करने की कभी कोशिश नहीं की, तथा गांधी जी ने अपनी गिरफ्तारी से पहले घोषित कर दिया था कि वह दलित वर्ग को एक अलग पक्ष नहीं मानते। उन्होंने आगे कहा, ‘‘इसलिए देश के राजनीतिक जीवन में अपनी स्थिति को हासिल करना आवश्यक हो गया है; वह स्थिति होगी पूर्ण