82. 12.1.1943 गैर-ब्राह्मण पार्टी को फिर से संगठित होना चाहिए। - Page 308

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गैर-ब्राह्मण दल की पुनः स्थापना हो

‘माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, श्रम सदस्य, भारत सरकार आज 12 जनवरी, 1943 को सुबह बम्बई पहुंचे। आशा है वह बम्बई में एक सप्ताह ठहरेंगे- ए.पी.। ख्1,

17 जनवरी, 1943 (रविवार) को डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, श्रम सदस्य, भारत सरकार ने आर.एम. भट्ट हाईस्कूल, परेल, बम्बई में मराठा और संबद्ध समुदायों की ओर से, अपने सम्मान में दी गई पार्टी में बोलते हुए विचार प्रकट किया कि भारत में सच्चा लोकतंत्र गैर-ब्राह्मण पार्टी के हाथों में ही सुरक्षित रह सकता है। उन्होंने

खेद व्यक्त किया कि गैर-ब्राह्मण पार्टी जो मद्रास और बम्बई प्रांतों में सत्ता में थी, अब विभिन्न कारणों से टूट गई है और उन्होंने आशा प्रकट की कि अतीत की गलतियों से सबक लेकर विभिन्न वर्गों में जो छोटे-मोटे मतभेद हैं, उन्हें मिटाकर वह पुनः एकजुट और मजबूत ताकत के रूप में उभरकर सामने आए।

किसी भी दल की सफलता के लिए उन्होंने तीन चीजें आवश्यक बताई- नेता, अच्छा संगठन और स्पष्ट तथा निश्चित उद्देश्य और कार्यक्रम। शर्म की बात है कि गैर-ब्राह्मण पार्टी के कुछ सदस्यों ने इसे छोड़ दिया है और वे कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। लेकिन अब उन्हें अपनी भूल पर पछतावा है। यह समुदाय विशेष के लोगों के लिए ही नहीं बल्कि भारत में लोकतंत्र के हित में भी आवश्यक है कि गैर -ब्राह्मण पार्टी दोबारा संगठित हो और ताकतवर पार्टी बनकर उभरे।

राव बहादुर आर.एस. असावले जिन्होंने सभा की अध्यक्षता की थी और राव बहादुर एस.के. बोलने, जिन्होंने सभा को संबोधित किया तथा मराठाओं और अन्य संबद्ध समुदायों में एकता की महत्ता पर बल दिया तथा उनके और डॉ. अम्बेडकर की पार्टी के बीच सहयोग का आग्रह किया। ख्2,

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12 दि बम्बई क्रानिकल, 13 जनवरी, 1943 दि टाइम्स ऑफ इंडिया, 18 जनवरी, 1943