84. 2.5.1943 गांधी और जिन्ना को अवकाश ग्रहण कर लेना चाहिए। - Page 310

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, श्रम सदस्य, वायसराय कार्य परिषद, फ्रंटियर मेल से दिनांक 2 मई, 1943 को बम्बई पहुंचे। डॉ. अम्बेडकर को 7 और 8 मई को श्रमिकों, मिल मालिकों और सरकार के प्रतिनिधियों के एक सम्मेलन की अध्यक्षता करनी थी। ख्1,

इस बात को दृढ़ता से कहते हुए कि श्री गांधी तथा कांग्रेस आलाकमान ने नितांत राजनीतिक दिवालियापन प्रदर्शित किया है, माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर श्रम सदस्य, भारत सरकार ने 9 मई, 1943 (रविवार) को नमगाम, बम्बई में अनुसूचित वर्गों के तत्वावधान में आयोजित एक विशाल जनसभा में तर्क दिया कि श्री गांधी को सक्रिय राजनीति से अवकाश ग्रहण कर लेना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि आल इंडिया मुस्लिम लीग के अध्यक्ष श्री जिन्ना, जिन्होंने एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान ग्रहण कर लिया है, को भी संयास ले लेना चाहिए, उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक ये दोनों नेता गद्दी नहीं छोडे़ंगे, तब तक भारतीय राजनीति को वर्तमान दलदल से ऊपर उठाने की कोई आशा नहीं की जा सकती। इसके बाद ही भारतीय राजनीति से यह आशा की जा सकती है कि वह ऐसे मार्ग पर चले, जो देश को प्रगति के रास्ते पर ले जाने में सहायक हो।

डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि श्री गांधी आज तक पैदा होने वाले सभी नेताओं में सबसे भाग्यशाली राजनेता हैं। वह भाग्यशाली हैं, क्योंकि उन्हें सक्रिय राजनीति के लिए आवश्यक सब चीजें कहने मात्र से सुलभ हो जाती हैं, जबकि दूसरे राजनेताओं को उन्हें जुटाने में अपनी आधी जिन्दगी लगानी पड़ती है। श्री गांधी के पास दोनों शक्तियां भरपूर हैं- जन शक्ति और धन शक्ति, जबकि स्वर्गीय श्री तिलक, श्री रानाडे और श्री गोखले के पास धन शक्ति कभी नहीं थी और जन शक्ति के लिए उन्हें अपनी पूरी जिन्दगी बितानी पड़ी।

इस परिप्रेक्ष्य में, पिछले 25 वर्षों का श्री गांधी का राजनीतिक जीवन असफलताओं से भरा पड़ा है। गोखले और रानाडे की शांत राजनीति की तुलना में

1 द संडे क्रानिकल, 2 मई, 1943