93. 24.9.1944 मैं भारत के देश भक्तों से बहुत आगे था। - Page 333

312 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नहीं, भारत के लोग हर हालत में केंद्र में कुछ न कुछ उत्तरदायित्व दिए जाने के लिए आग्रह करेंगे। भारत के लोग कभी भी मात्र प्रांतीय स्वायत्तता से संतुष्ट होने के लिए राजी नहीं होंगे, बल्कि वे चाहेंगे कि उन्हें केंद्र में कोई उत्तरदायित्व सौंपा जाए। हमें उस वृद्ध सज्जन से इससे बहुत आगे जाने की आशा थी, क्योंकि उसकी आज्ञा थी स्वाधीनता। अजीब बात है, दुर्भाग्यवश और देश के लिए घातक, उस वृद्ध सज्जन को इतना सिखाया-पढ़या गया था कि उसे इस बात के लिए राजी कर लिया गया था कि 1931 की परिस्थितियों में, वह साइमन कमीशन की सिफारिशों से संतुष्ट हैं और उन्हें मानने के लिए तैयार हैं। सज्जनो! स्थिति किसने संभाली? तत्कालीन विदेश मंत्री सर सेमुअल होर और कन्जरवेटिव पार्टी जो सत्ता में थी, गोलमेज सम्मेलन को बंद करने के लिए आतुर थी। बड़ी बात यह थी, कि हमने एक ़ित्रपक्षीय आयोग नियुक्त किया था जिसमें पार्लियामेंट की तीन पार्टियों अर्थात लिबरल, लेबर और कन्जर्वेटिव पार्टियों के प्रतिनिधि थे। सर सेमुअल होर इस बात को सम्मान की बात मानते थे कि पार्लियामेंट को साइमन कमीशन की सिफरिशों के पक्ष में रहना ्चाहिए और उसकी सिफारिशों से आगे नहीं जाना चाहिए। गांधी जी का दृष्टिकोण ईश्वर प्रेषित हस्तक्षेप था। सर सेमुअल होर का यह तर्क कि यदि श्री गांधी भारत का सबसे महान आदमी नहीं है, तो उनसे महान कौन है? सप्रू कौन है, डॉ. अम्बेडकर कौन हैं? जिन्ना कौन है? यदि श्री गांधी प्रांतीय स्वायत्तता से संतुष्ट हैं, तो सारा खेल बंद कर देना चाहिए और सम्मेलन समाप्त कर दिया जाना चाहिए तथा पार्लियामेंट को साइमन कमीशन की सिफारिशों के अनुरूप एक विधेयक बनाने में गर्व महसूस होना चाहिए। मैं उन लोगों में से एक था, जिन्होंने इस प्रकार के प्रस्ताव का विरोध किया था। हमने कहा था कि हम ऐसा कभी नहीं कर सकते और उसमें पक्षकार नहीं बन सकते। हमने इतना विक्षोभ उत्पन्न किया कि ब्रिटिश कैबिनेट को एक छोटी सी कैबिनेट समिति इस बात पर साक्ष्य लेने के लिए नियुक्त करनी पड़ी कि गोलमेज सम्मेलन के प्रतिनिधियों की वास्तविक भावना क्या है। मामले के परीक्षण के लिए अभ्यावेदन आमंत्रित किए गए और मैं उन धैर्यवान व्यक्तियों में से एक था, जिनसे कैबिनेट समिति के समक्ष साक्ष्य पेश करने के लिए कहा गया था। उस समिति के अध्यक्ष थे, लार्ड चांसलर तथा उसके अन्य दो सदस्य थे - प्रधानमंत्री और सचिव। मैं यह कहना चाहता हूं और मुझे इस बात पर गर्व है कि मैं उन लोगों में से एक था जिन्होंने कैबिनेट समिति को बताया था कि दलित वर्ग भी पार्लियामेंट का पीछे हटना सहन नहीं करेंगे। मैंने जो भूमिका निभाई, उसके बारे में क्या कोई कह सकता है कि वह नगण्य थी? क्या यह कहा जा सकता है कि अनुसूचित जातियां, केन्द्र में उत्तरदायित्व के विरोध में थीं। आइए आपके सामने एक दूसरा उदाहरण पेश करूँ। हमारे देश में अनेक देशी रियासतें हैं बल्कि वस्तुतः