106. 17.2.1946 अनुसूचित जातियों की मांगे एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के पास भेजी जाएं। - Page 367

346 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

v u q l wfp r
tk fr;
arjj k"Vª h;
U;k; kfèk dj

106

अनुसूचित जातियों की मांगें एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय

17 फरवरी, 1946 को बम्बई के नरेपार्क में जब डॉ. अम्बेडकर चुनाव अभियान का उद्घाटन करने के लिए खड़े हुए तो 70,000 स्त्री-पुरुषों के समूह ने उनका जोरदार अभिनंदन किया।

उस सभा में डॉ. अम्बेडकर को 17,000 रुपए की राशि अभियान के लिए भेंट की गई थी। फेडरेशन की बम्बई शाखा के अध्यक्ष श्री जी.एम. जाधव ने घोषणा की कि अभियान के लिए हमारा लक्ष्य 50,000/- रुपए था, और अब यह मई तक पूरा हो जाएगा।

अभियान के उद्घाटन समरोह से पहले डॉ. अम्बेडकर द्वारा अनुसूचित जातियों का ध्वज फहराया गया। डॉ. अम्बेडकर के सम्मान हेतु अनुसूचित जाति के स्वयंसेवकों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया गया। विशाल जन-समूह के बावजूद पूरे समारोह में पूरी व्यवस्था बनी रही। डॉ. अम्बेडकर के भाषण के बीच-बीच में जोरदार जय-जयकार हुआ।

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने नरेपार्क, बम्बई में अनुसूचित जाति फेडरेशन के चुनाव अभियान का उद्घाटन करते हुए कहा, यदि कांग्रेस ‘‘यह महसूस करती है कि अनुसूचित जातियों की मांगें अनुचित हैं तो यह मामला एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के पास भेज दिया जाए और वह उस फैसले का अनुपालन करेंगे। उन्होंने कहा कि स्वराज में जिसके लिए कांग्रेस शोर मचा रही है, हिंदू लोग राष्ट्र पर प्रभुत्व कायम करके अंग्रेजों का स्थान ले लेंगे।

‘‘पिछले कुछ दिनों में कांग्रेसियों के भाषण से यह धारणा पैदा हुई है कि यदि केंद्र में राष्ट्रीय सरकार बनी तो खाद्य समस्या हल हो जाएगी।’’ डॉ. अम्बेडकर ने इस कथन को ठीक बताया साथ ही कहा कि कांग्रेसी कोई जादू नहीं कर देंगे।

खाद्य स्थिति को ठीक करने की ये सब बातें कोरी बकवास है।

डॉ. अम्बेडकर ने अनुसूचित जाति आंदोलन को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस स्वराज के लिए शोर मचा रही है, लेकिन अनुसूचित जातियाँ निश्चित समझ लें कि जिस स्वराज की कांग्रेस मांग कर रही है, वह अंग्रेजों की जगह हिंदुओं के ही प्रभुत्व में होगा। अनुसूचित जातियां ऐसा न होने दें। वे देखें