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कि उन्हें उनके सब अधिकार प्राप्त हों, ताकि स्वतंत्र भारत में वे भी स्वतंत्र रहें।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियां मुसलमानों की तरह देश के बँटवारे की मांग नहीं कर रही हैं। वे तो केवल एक निष्पक्ष व्यवस्था चाहती हैं। वे सदियों से प्रताडि़त रही हैं, लेकिन अब वे शोषित होने से इंकार करती हैं।
वे तो बस समान राजनीतिक अधिकार चाहते हैं न कि संरक्षण। यदि कांग्रेस समझती है कि उनकी मांगें उचित नहीं हैं तो इस मामले को एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण को भेज दिया जाए। वह ऐसे न्यायाधिकरण के निर्णय का पालन करने के लिए प्रस्तुत हैं।
डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा कि वे अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हर बलिदान देने को तैयार है। कांग्रेस या कोई अन्य राजनीतिक संगठन उन्हें डराने की कोशिश न करे। बम्बई में विधानसभा के आरंभिक चुनावों के दौरान एक अनुसूचित जाति का मतदाता मारा गया था। डॉ. अम्बेडकर ने उसकी मृत्यु का उत्तरदायित्व कांग्रेस पर डाला और उस मारे गए मतदाता की अंतिम यात्रा पर पुलिस लाठी चार्ज की निन्दा की।
डॉ. अम्बेडकर ने विचार प्रकट किया कि कांग्रेस देश में संपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र पर प्रभुत्व रखने को अडिग है और इस प्रयास में वह घूस देने के लिए भी प्रयासरत है। कांग्रेस ने अलग-अलग व्यक्तियों को संरक्षण दिया है, लेकिन अनुसूचित जाति फेडरेशन जैसे संगठनों की जड़ें काटी हैं।
लेकिन अब फेडरेशन ऐसे प्रयत्नों का विरोध करने के लिए काफी मजबूत है और वह अधिकाधिक मजबूत होती जा रही है। जब तक उसके राजनीतिक अधिकारों को मंजूर नहीं किया जाएगा, तब तक उन्हें हिंदुओं से कोई लेना-देना नहीं है।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में कांग्रेसियों के भाषणों से यह धारणा बनी है कि यदि केंद्र में राष्ट्रीय सरकार बनी तो खाद्य समस्या हल हो जाएगी। ठीक है, लेकिन कांग्रेसी कोई जादू नहीं कर सकते। खाद्य स्थिति को ठीक करने की ये सब बातें खोखली बातें हैं, मानों कार्यकारी परिषद के कुछ सदस्यों की जगह हिंदुओं को लेना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ‘बांटो और राज करो’ की नीति अपनाने के लिए ब्रिटिश सरकार पर इल्जाम लगाती है। निश्चित रूप से यही वह खेल था जो कांग्रेस ने पिछले आम चुनाव में अनुसूचित जाति फेडरेशन की बात कुछ सफलता के साथ
खेला था। उन्हें कोई संदेह नहीं है कि आगामी चुनाव में भी वह पुनः अपनी चाले चलेगी। लेकिन अनुसूचित जातियां उसकी शिकार नहीं बनेंगी।