123. 12.6.1951 अनुसूचित जातियों को राजनीतिक अलगाव छोड़ देना चाहिए। - Page 412

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डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने 12 जून, 1951 को बंबई में भाषण दिया था।

‘‘अनुसूचित जातियों को अपने राजनीतिक अलगाव को छोड़ देना चाहिए और हमारी नई आजादी को मजबूत करने के लिए अन्य समुदायों के साथ सहयोग करना चाहिए। लेकिन ऐसे सहयोग में अनुसूचित जाति फेडरेशन का पृथक, अस्तित्व बनाए रखना चाहिए। आपको कांग्रेस के प्रति अपनी नीतियाँ पूरी तरह बदलनी होंगी। अब तक कांग्रेस के साथ हमारे संबंध विपक्षी के संबंध रहे हैं। राजनीतिक क्षेत्र में हम एक दूसरे के शत्रु रहे हैं। अब तक हम अपने दृष्टिकोण में संकीर्ण रहे हैं, क्योंकि हमारे सामने एकमात्र हित, हमारे समाज का हित रहा है। अब हमने आजादी प्राप्त कर ली है, तो हमें अपना दृष्टिकोण पूरी तरह बदल लेना चाहिए और अपनी जाति के हित की दृष्टि से दूसरों के साथ सहयोग करना चाहिए तथा अपनी नई आजादी को सुदृढ़ करने में मदद करनी चाहिए।

‘‘यह कहना गलत है कि फेडरेशन की नींव धराशायी होने वाली है। वास्तव में हमने शक्ति प्राप्त की है और हम सुदृढ़ रूप से एकजुट हैं, लेकिन 1946 के चुनाव में फेडरेशन की बहुत बुरी पराजय हुई। मैंने देखा कि हममें से कुछ का अपनी जाति के हितों की रक्षा के लिए संविधान सभा में प्रवेश करना अनिवार्य है। तब सभी दरवाजे और खिड़कियाँ हमारे लिए बंद थीं। मुझे स्वयं भरोसा नहीं था, लेकिन फिर भी मैं बंगाल से चुनाव में खड़ा हो गया और जीत गया।

‘‘उस समय मुझे लेश मात्र ख्याल नहीं था कि मैं समग्र राष्ट्र के लिए कुछ करूँगा। देश का संविधान बनाने की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर डाली गई। अब मैं यह महसूस करता हूँ कि मेरे लिए और समाज के लिए यह एक स्वर्णिम मौका था। इस संविधान की रचना करके मैंने हिंदुओं को समझाया जो हमें पिछले 20 वर्ष से मुझे और मेरी पार्टी को राष्ट्र-विरोधी अपशब्द कहते रहे हैं कि वे एकदम गलत हैं। हम भी अन्य किसी की भाँति एक पक्के राष्ट्रवादी संगठन हैं।

‘‘अब समय बदल गया है और हम हिंदू प्रभुत्व के समय से भिन्न हैं। उस