390 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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बिल का उद्देश्य, स्त्रियों की सामाजिक प्रगति का था
दिनांक 26 दिसंबर, 1950 को डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने अनुसूचित जाति फेडरेशन की बेलगाम जिला शाखा के तत्वाधान में 50,000 लोगों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा -
‘हिंदू कोड बिल’ का प्रारूप उन्होंने तैयार किया था। भारत में स्त्रियों में नैतिक साहस की कमी और चरित्र बल की कमी इस में बाधक रही थी। डॉ. अम्बेडकर ने घोषित किया कि कोई भी विख्यात स्त्री नेता हमारी स्त्रियों की सामाजिक प्रगति में वास्तविक रुचि नहीं रखती।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा ‘मैंने इस बिल का प्रारूप’ स्मृतियों के निर्देशों के अनुसार तैयार किया था। ‘स्मृतियाँ’ स्त्रियों को अनेक अधिकार प्रदान करती है। इस बिल का एकमात्र उद्देश्य स्त्रियों की सामाजिक प्रगति में कानून की बाधा को दूर करना था। स्वाधीनता धन पर निर्भर हैं और स्त्री को अपनी आजादी को कायम रखने के लिए अपने धन और अधिकारों को विशेष रूप से सुरक्षित रखना चाहिए।
डॉ. अम्बेडकर ने हिंदू कोड बिल की तुलना ऐसे दूध से की जिसमें कड़वा अम्ल मिलाकर दूषित कर दिया गया है। कुछ रूढि़वादी लोगों और यहाँ तक स्त्रियों द्वारा भी जिन के फायदे के लिए यह बिल पेश किया गया था, लाए गए आंदोलनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने टिप्पणी की, ‘मैं हर किसी को यह चुनौती देता हूँ कि वह मुझे दिखाए कि क्या बिल की एक भी धारा ‘स्मृतियों’ के निर्देशों पर आधारित नहीं है।’ ख्1,
1 द टाइम्स ऑफ इंडिया, 26 दिसंबर, 1950, ‘हिंदू कोड बिल का विरोध : डॉ. अम्बेडकर की आलोचना’ पुनर्मुद्रित भारिल, पृष्ठ 101-102.