432 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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‘‘25 नवम्बर, 1951 को मुबंई की एक चुनावी सभा में डॉ. अम्बेडकर ने श्री नेहरू को कांग्रेस छोड़कर ‘देश हित के लिए समाजवादियों और मेरे जैसे लोगों से हाथ मिलाने’ का न्योता दिया।’’
सोशलिस्ट पार्टी और अनुसूचित जाति फेडरेशन के आह्वान पर आयोजित रैली में दो लाख से अधिक लोगों का शिवाजी पार्क में जमावड़ा हुआ।
फेडरेशन के तारे-जडि़त नीले झंडे और सोशलिस्ट पार्टी के लाल झंडे चारों तरफ नजर आ रहे थे। भीड़ की वजह से शिवाजी पार्क के पास टै्रफिक जाम हो गया था, जिसको नियंत्रित करने में दोनों दलों के लाल और नीले टोपीधारी सैकड़ो स्वयंसेवक लगे हुए थे।
श्री नेहरू के चौपाटी में दिए गए भाषण, जिसमें प्रधानमंत्री ने उनके आरोपों से इनकार किया था, का हवाला देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस ने अनुसूचित जातियों की दशा में कुछ भी सुधार नहीं किया है और यह भी कहा कि, ‘‘चीन और रूस के संबंध में सरकार की विदेश नीति अनिष्टकारी है।’’
उन्होंने कहा कि उनके द्वारा ये आरोप ढाई महीने पहले ही लगाए थे जब उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था, किंतु तब श्री नेहरू ने उन पर ध्यान नहीं दिया और अब वे उसका खंडन तब कर रहे हैं जब उन्होंने शुक्रवार के अखबारों में वे रिपोर्टें पढ़ी जिनमें उनके (डॉ. अम्बेडकर के) आरोप की पुनरावृति हुई थी। विदेश नीति पर उनके मतभेद के बारे में वे बोले कि उन्होंने अपने मतभेद मंत्रिमंडल के सम्मुख उठाने लायक महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं माना था। इसके अलावा वह संविधान का मसौदा तैयार करने जैसे अधिक महत्वपूर्ण और श्रमसाध्य कार्य में पूरी तरह मशगूल थे।
उनके विचार में श्री नेहरू ने उनके आरोपों से इंकार करके अपनी छवि
खराब की है। अनुसूचित जातियों के प्रति सरकार की कथित उपेक्षा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि, ‘‘भले ही श्री नेहरू ने इनसे इंकार किया है, किंतु यह बिलकुल सत्य है।’’ प्रधानमंत्री के लिए सही तरीका तो यह होता कि वे एक प्रेस का बयान जारी करते हुए सरकार द्वारा अनुसूचित जातियों की बेहतरी के लिए किए गए कार्यों का एक ब्योरा देते, ताकि लोग स्वयं निर्णय करते कि गलत वे हैं या कि सरकार।
उन्होंने श्री नेहरू के इस दावे को चुनौती दी कि केवल कांग्रेस ही देश में स्थायी सरकार बनाने में सक्षम होगी। कांग्रेस के भीतर कई आंतरिक मतभेद थे और